नई दिल्ली : मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग कराने का अनुरोध विधानसभा ने अस्वीकार कर दिया है। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय की ओर से उन्हें पत्र भेजकर स्पष्ट किया गया कि विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही पूरी तरह गोपनीय होती है और नियमों के तहत इसकी लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती।
दरअसल, दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने केजरीवाल को एक मामले में तलब किया है, जिसे ‘फांसी घर’ से जुड़ा मामला बताया जा रहा है। इस संबंध में केजरीवाल को आज दोपहर तीन बजे समिति के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया था। इस बीच केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि वह समिति के सामने निर्धारित समय पर उपस्थित होंगे। उन्होंने लिखा कि उन्हें फांसी घर के मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाया गया है और वह दोपहर तीन बजे विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होंगे।
वहीं, दिल्ली विधानसभा सचिवालय की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि समिति की कार्यवाही को गोपनीय रखा जाना विधानसभा की स्थापित प्रक्रिया का हिस्सा है। पत्र में कहा गया है कि नियमों के अनुसार विशेषाधिकार समिति की बैठकों को सार्वजनिक नहीं किया जाता और न ही उनकी लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति होती है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि समिति के सदस्य बिना किसी बाहरी दबाव या प्रभाव के स्वतंत्र रूप से विचार-विमर्श कर सकें और संवेदनशील मामलों पर खुलकर चर्चा हो सके।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि समिति की कार्यवाही को अत्यंत गोपनीय माना जाता है और यह गोपनीयता विधानसभा की कार्यप्रणाली का एक महत्वपूर्ण तत्व है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि जांच या सुनवाई से जुड़े मामलों में निष्पक्षता बनी रहे और निर्णय प्रक्रिया प्रभावित न हो।
इस पूरे मामले पर समिति के अध्यक्ष ने भी प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल के अनुरोध पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उनका कहना है कि केजरीवाल पिछले दस वर्षों से अधिक समय से विधानसभा के सदस्य रहे हैं और उन्हें सदन की प्रक्रियाओं और नियमों की जानकारी होनी चाहिए। अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल कई बार विशेषाधिकार समिति की बैठकों में भी हिस्सा ले चुके हैं, ऐसे में उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि उन्हें समिति की गोपनीयता से जुड़े प्रावधानों के बारे में जानकारी होगी।
समिति अध्यक्ष के अनुसार विशेषाधिकार समिति की बैठकों में कई बार ऐसे विषयों पर चर्चा होती है जो संवेदनशील होते हैं और जिन पर खुलकर विचार-विमर्श के लिए गोपनीयता जरूरी होती है। यदि कार्यवाही को सार्वजनिक किया जाए या उसकी लाइव स्ट्रीमिंग की जाए तो इससे समिति के सदस्यों पर बाहरी दबाव बन सकता है, जो निष्पक्ष निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल केजरीवाल ने स्पष्ट किया है कि वह समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखेंगे। वहीं विधानसभा सचिवालय की ओर से भी यह साफ कर दिया गया है कि विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही से जुड़े नियमों में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती। ऐसे में समिति की सुनवाई तय प्रक्रिया और गोपनीयता के नियमों के तहत ही आगे बढ़ेगी।
