एसपी चीफ ने मणिकर्णिका घाट, मंदिरों और शंकराचार्य मुद्दे पर भी घेरा, PDA वोट अधिकार की बात दोहराई
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “यह सरकार विरोध स्वीकार नहीं कर सकती” और कई योजनाओं व परियोजनाओं पर गंभीर आरोप लगाए।
पानी की टंकियां भ्रष्टाचार का भार नहीं सह पा रहीं

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में बन रहीं पानी की टंकियां भ्रष्टाचार के कारण टिक नहीं पा रहीं और टूट रही हैं। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का बजट घटाया जा रहा है और प्राथमिकताएं बदली जा रही हैं।
फॉर्म-7 से वोट कटवाने का आरोप
सपा प्रमुख ने दावा किया कि मुसलमानों, पिछड़ों, दलितों, आदिवसियों और गरीब तबकों के वोट फॉर्म-7 नोटिस के जरिए कटवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए और वोट के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए
काशी और धार्मिक मुद्दों पर बयान
उन्होंने आरोप लगाया कि काशी में मणिकर्णिका घाट के पास तोड़फोड़ हुई है और राजमाता अहिल्याबाई से जुड़ी मूर्ति को नुकसान पहुंचा है।उन्होंने यह भी कहा कि कई मंदिरों को हटाया गया और नेपाल नरेश का दान किया गया घंटा भी गायब है। शंकराचार्य से जुड़े एक पुराने प्रकरण पर उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार के समय की घटना “गलत परिस्थितियों” में हुई थी, और तब माफी भी मांगी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने शंकराचार्य का अपमान किया।
CM का मतलब Corrupt Mouth?
युवा पीढ़ी पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि “GenZ के नौजवान CM का मतलब ‘Corrupt Mouth’ निकाल रहे हैं”, जो सरकार के प्रति युवाओं की नाराजगी दर्शाता है। जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जिसने इसे बनवाया, वह अब भाजपा में है,“पहले अपनी पार्टी में जवाबदेही तय करें।”
मेडिकल कॉलेज-अस्पताल उपेक्षित, स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार पर स्वास्थ्य ढांचे की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय बने मेडिकल कॉलेज, कैंसर इंस्टीट्यूट और अन्य अस्पतालों की “जानबूझकर उपेक्षा” की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में बने मेडिकल कॉलेजों की इमारतें तो खड़ी कर दी गईं, लेकिन उन्हें पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए। उनके मुताबिक कई मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और ट्रामा सेंटर “बिना स्टाफ” के संचालित हो रहे हैं।उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और विभाग पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विभाग में निर्णय क्षमता और प्रभावी संचालन का अभाव है, जिसके कारण प्रदेश की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
अस्पतालों की उपेक्षा
सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि जनहित के अस्पतालों की उपेक्षा हो रही है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
