नई दिल्ली : पिछले कुछ वर्षों से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) के स्थापना दिवस मनाने की परंपरा में एक नया और विवादित ट्रेंड देखने को मिल रहा है। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), देश की पहली रक्षा पंक्ति सीमा सुरक्षा बल (BSF) और हिमालय की बर्फीली सीमाओं की रक्षा करने वाले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के स्थापना दिवस की आधिकारिक तिथियों में बार-बार बदलाव किए जा रहे हैं। इस बदलाव को लेकर अब पूर्व जवानों और वेलफेयर संगठनों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
सीआरपीएफ स्थापना दिवस: तय तारीख से पहले मनाया जा रहा समारोह
सीआरपीएफ का स्थापना दिवस आधिकारिक रूप से 19 मार्च को मनाया जाता है, लेकिन इस वर्ष इसका 87वां स्थापना दिवस 21 फरवरी को मनाया जा रहा है। इस अवसर पर भव्य परेड का आयोजन गुवाहाटी में किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि होंगे।
यह पहली बार नहीं है जब सीआरपीएफ स्थापना दिवस की तिथि बदली गई हो। इससे पहले 86वें स्थापना दिवस की डीजी परेड 15 अप्रैल को मध्य प्रदेश के नीमच में हुई थी, जबकि 84वें स्थापना दिवस की परेड 25 मार्च को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित की गई थी।
सीआरपीएफ का ऐतिहासिक सफर और तिथियों का भ्रम
सीआरपीएफ की स्थापना 27 जुलाई 1939 को “क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस” के रूप में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद 28 दिसंबर 1949 को संसद के अधिनियम के तहत इसे “केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल” का दर्जा मिला। 1950 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने 19 मार्च को सीआरपीएफ को राष्ट्रपति ध्वज (President Colours) प्रदान किया था। इसी आधार पर चार वर्ष पहले निर्णय लिया गया कि हर वर्ष 19 मार्च को ही “सीआरपीएफ डे” मनाया जाएगा। बावजूद इसके, व्यावहारिक स्तर पर इस तिथि को बार-बार बदला जाता रहा है।
बीएसएफ और आईटीबीपी में भी बदली जाती रही तारीखें
बीएसएफ की स्थापना 1 दिसंबर 1965 को हुई थी, लेकिन पिछले वर्ष इसका 61वां स्थापना दिवस 21 नवंबर को गुजरात के भुज में मनाया गया। इतना ही नहीं, यही समारोह 8 दिसंबर को जोधपुर में भी आयोजित किया गया। इसी तरह, आईटीबीपी की स्थापना 24 अक्टूबर 1962 को हुई थी, लेकिन हाल के वर्षों में इसके स्थापना दिवस की परेड भी तय तिथि से अलग दिन आयोजित की जाती रही है। पिछले वर्ष यह परेड 22 नवंबर को ऊधमपुर में हुई, जिससे बल के पूर्व अधिकारियों और जवानों में असंतोष फैल गया।
वेलफेयर संगठनों का विरोध, मनोबल पर असर का आरोप
एलॉयंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हर जवान के लिए गर्व का दिन होता है। तिथियों में बदलाव से जवानों के मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ता है। पूर्व आईजी आईटीबीपी एस.के. शर्मा और सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एच.आर. सिंह ने भी इस प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वीआईपी की उपलब्धता, चुनावी व्यस्तताओं या व्यक्तिगत कारणों से तारीखें बदलना अनुचित है।
जवानों और उनके परिवारों पर पड़ता है असर
पूर्व अधिकारियों के अनुसार, स्थापना दिवस की तारीखों में अनिश्चितता के कारण जवानों की छुट्टी योजनाएं प्रभावित होती हैं। कई जवान अपने परिवार को इस गौरवशाली दिन का हिस्सा बनाना चाहते हैं, लेकिन तिथि बदलने से उनकी पारिवारिक योजनाएं बिगड़ जाती हैं। इसका असर न केवल जवानों, बल्कि उनके परिवारों के मनोबल पर भी पड़ता है।
गृह मंत्रालय को पत्र, तय तारीख पर आयोजन की मांग
पूर्व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अध्यक्ष और बीएसएफ के पूर्व आईजी एस.एस. कोटियाल ने भी इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि स्थापना दिवस जैसे गरिमामयी समारोह वास्तविक और ऐतिहासिक तिथियों पर ही आयोजित होने चाहिए।
निष्कर्ष: परंपरा बनाम प्रशासनिक सुविधा
सीएपीएफ के स्थापना दिवस की तिथियों में बार-बार बदलाव अब एक गंभीर बहस का विषय बन चुका है। जहां प्रशासनिक स्तर पर इसे सुविधा और परिस्थितियों से जोड़ा जा रहा है, वहीं जवान और पूर्व अधिकारी इसे परंपरा और सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार और गृह मंत्रालय इस असंतोष को कैसे दूर करते हैं और क्या भविष्य में स्थापना दिवस वास्तविक तिथियों पर ही मनाए जाएंगे।
