लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर किसानों का मुद्दा केंद्र में है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीड़ा) की कार्रवाई से पीड़ित झांसी-बबीना क्षेत्र के 33 गांवों के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में मिला। किसानों ने जमीन अधिग्रहण में अन्याय और मुआवजा न मिलने की शिकायतें रखते हुए न्याय दिलाने की मांग की।
किसानों को पूरी मदद का भरोसा: अखिलेश यादव

डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर पार्टी पहले भी सक्रिय रही है और नेता विरोधी दल विधान परिषद लाल बिहारी यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल झांसी और बबीना जाकर डीएम से मिल चुका है। “जब जिलाधिकारी ने किसानों की बात मानी थी, तो यह सरकार की जिम्मेदारी थी कि उसका पालन करे”।उन्होंने वादा किया कि समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल फिर से झांसी जाएगा और किसानों की लड़ाई को आगे बढ़ाया जाएगा।
मुआवजा बाजार भाव पर मिलना चाहिए, दबाव डालकर दस्तखत न कराएं
सपा प्रमुख ने कहा कि जब भूमि अधिग्रहण अधिनियम है, तो सरकार को सर्किल रेट बढ़ाकर चार गुना मुआवजा देना चाहिए। किसानों से दबाव में सहमति पत्र पर दस्तखत कराना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने बताया कि सरकार की नाकामी का उदाहरण यह है कि जिन विस्थापित किसानों को जमीन दी गई थी, वह आज तक उनके नाम नहीं हुई है।
“अयोध्या की लूट से तुलना”, भाजपा पर तीखा हमला
सपा प्रमुख ने बबीना की घटना की तुलना अयोध्या से करते हुए कहा कि “भाजपा ने वहां भी गरीबों और किसानों की जमीनें लूट कर मुनाफा कमाया था, और उसी का नतीजा था कि प्रभु श्रीराम ने भाजपा को अयोध्या की धरती से हरवा दिया।” उन्होंने बुंदेलखंड के किसानों से अपील की कि वे भाजपा को सबक सिखाएं। क्योंकि “भाजपा ने बुंदेलखंड में तोप बनाने का वादा किया था, लेकिन सुतली बम भी नहीं बना पाई।”
किसानों ने रखीं समस्याएं
प्रतिनिधिमंडल ने सौंपे गए ज्ञापन में समस्याओं को गिनाया। बोले,हर अधिग्रहित किसान परिवार को एक सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। बीड़ा क्षेत्र में बनने वाले स्कूलों में मुफ्त शिक्षा और रोजगार की सुविधा हो। सर्किल रेट में 2015 से हर वर्ष 20 फीसद बढ़ोतरी की जरूरत है। प्रत्येक किसान की 30 फीसद जमीन को विकसित क्षेत्र में शामिल किया जाए। प्रभावितों को आवासीय कॉलोनी में मकान, जमीन देने वाले किसानों को कैपिटल गेन टैक्स से छूट, बीड़ा द्वारा बनाए गए मॉल/कॉम्प्लेक्स में दुकानों का आवंटन किसानों को होना चाहिए। 1962 में बनी फायरिंग रेंज के कारण कई किसान आज भी मालिकाना हक से वंचित हैं। गांवों में बने नये मजरे और बसावटों को आबादी में नहीं गिना जा रहा है। इसको बंद किया जाना चाहिए। सांसद की जमीन को बीड़ा अधिग्रहण क्षेत्र से बाहर कर देना पक्षपात का प्रतीक
प्रतिनिधिमंडल में यह थे शामिल
राजनीतिक प्रतिनिधियों में लाल बिहारी यादव (एमएलसी), नारायण दास अहिरवार (सांसद), डॉ. मान सिंह यादव (एमएलसी), दीप नारायण (पूर्व विधायक), सतीश जतारिया (पूर्व विधायक), बृजेंद्र सिंह भोजला (जिलाध्यक्ष झांसी) और कई अन्य शामिल रहे। किसानों की ओर से चंद्रपाल सिंह, सुनील कुमार, करन, मुलायम सिंह राजपूत, प्रताप, जितेंद्र सिंह, फौजी अजब सिंह समेत दर्जनों लोगों ने अपनी बात रखी।
