नई दिल्ली : संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे प्रशासनिक फैसला मानने से इनकार कर दिया है। शनिवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह तबादला न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा और गंभीर हमला है।
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार प्रभारी पवन खेड़ा ने कहा कि संभल सीजेएम का तबादला ऐसे समय में किया गया है, जब उन्होंने संभल हिंसा मामले में तत्कालीन सर्किल ऑफिसर अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। खेड़ा के मुताबिक, यह संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी कार्रवाई है, जिसका मकसद न्यायिक अधिकारियों पर दबाव बनाना और उन्हें डराना है।
पवन खेड़ा ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह के तबादलों को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर नजरअंदाज किया गया, तो इससे देश में कानून के शासन, संस्थाओं की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। कांग्रेस का कहना है कि न्यायपालिका को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि यह संदेश जाए कि न्यायिक स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राजनीतिक फायदे के लिए न्यायपालिका पर व्यवस्थित तरीके से दबाव बना रही है। पवन खेड़ा ने कहा कि तबादलों को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर न्यायपालिका को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, जो एक तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक अधिकारी का तबादला नहीं है, बल्कि एक खतरनाक परंपरा की शुरुआत है।
संभल सीजेएम के तबादले पर कांग्रेस की नाराजगी उस समय और बढ़ गई, जब स्थानीय वकीलों ने भी इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। संभल के वकीलों ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका की आजादी को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और एक ईमानदार अधिकारी को उसके कर्तव्य निभाने की सजा दी गई है। वकीलों का कहना है कि अगर न्यायिक अधिकारियों को इस तरह डराया जाएगा, तो आम लोगों को न्याय कैसे मिलेगा। पूरा विवाद 9 जनवरी से जुड़ा है, जब संभल हिंसा मामले में सीजेएम विभांशु सुधीर ने अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश के कुछ ही समय बाद उनका तबादला कर दिया गया, जिससे कई सवाल खड़े हो गए। कांग्रेस का कहना है कि यह तबादला बदले की भावना से किया गया है।
पवन खेड़ा ने यह भी बताया कि विभांशु सुधीर का तबादला आगरा से संभल में 18 सितंबर 2025 को हुआ था। महज चार महीने के भीतर उनका ट्रांसफर होना न केवल असामान्य है, बल्कि यह राजनीतिक हस्तक्षेप और संस्थागत दबाव की ओर साफ इशारा करता है। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में किसी सीजेएम का तबादला होना अपने आप में सवाल खड़े करता है। कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने एक खतरनाक राजनीतिक फार्मूला अपना लिया है, जिसमें पहले सांप्रदायिक तनाव पैदा किया जाता है, फिर सरकारी हिंसा को बढ़ावा दिया जाता है, अपराधियों को बचाया जाता है और अंत में जो भी संस्था जवाबदेही की मांग करती है, उसे दबाने की कोशिश की जाती है। खेड़ा के मुताबिक, संभल की घटना इस रणनीति का ताजा उदाहरण है।
अंत में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपील की कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादले पर स्वतः संज्ञान लें। पार्टी का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के तबादले का नहीं, बल्कि न्यायिक स्वतंत्रता और न्यायपालिका व कार्यपालिका के बीच संवैधानिक संतुलन से जुड़ा हुआ है। अगर इस पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो इसके दूरगामी और खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।
