सपा प्रमुख ने सांसदों को जनता के मुद्दों पर लड़ने, और घोषणा पत्र बनाने के दिए निर्देश, बूथ मजबूत कर जनता के बीच रहने को कहा
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के सभी सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पर आयोजित हुई। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर संविधान, लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने के गंभीर आरोप लगाए और 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर स्पष्ट रणनीति भी रखी।
“भाजपा शासन में संविधान और लोकतंत्र दोनों खतरे में”
सांसदों को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा शासन में कानून का राज समाप्त हो चुका है और संविधान पर सीधा हमला हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस ने हमेशा लोकतंत्र और संविधान के साथ नाइंसाफी की है। अखिलेश यादव ने कहा कि विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर भाजपा वोटर लिस्ट में धांधली करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय और राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूचियों में भारी अंतर है, जो गंभीर संदेह पैदा करता है। उनके मुताबिक, यह भाजपा सरकार की “बेईमानी की राजनीति” को उजागर करता है।
भ्रष्टाचार, अन्याय और अत्याचार का आरोप

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में अन्याय, अत्याचार और जुल्म चरम पर हैं। सरकारी बजट का बंदरबांट और खुली लूट हो रही है और भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने जनता के साथ धोखा किया है और लोगों के अधिकारों को कुचलने का काम किया जा रहा है।
मंदिर तोड़ने के आरोप, सनातन पर हमला
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर धार्मिक मुद्दों को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में इतने मंदिर तोड़े गए, जितने किसी राजा के शासन में नहीं तोड़े गए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने शंकराचार्य जी, महारानी अहिल्या बाई होल्कर का अपमान किया और काशी से उनके नाम और कार्यों को मिटाने की कोशिश की जा रही है।
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार सनातन संस्कृति और विरासत के खिलाफ काम कर रही है, जबकि मुख्यमंत्री “धृतराष्ट्र बनकर सब कुछ होते हुए भी अनदेखा कर रहे हैं।”
2027 की तैयारी का ऐलान

पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2027 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। उन्होंने सभी सांसदों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में दिन-रात मेहनत करें, जनता के सुख-दुख में साथ खड़े रहें और स्थानीय मुद्दों के लिए संघर्ष करें। उन्होंने बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव में जनपदीय स्तर पर घोषणा पत्र तैयार किया जाएगा, जिसमें जनता के वास्तविक मुद्दों को शामिल किया जाएगा। सांसदों और विधायकों को क्षेत्रों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
कार्यकर्ताओं से बोले-“पीडीए से ही मिलेगा न्याय”
सांसदों की बैठक के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा को “धोखेबाज पार्टी” बताया और कहा कि भाजपा सरकार हर वर्ग को अपमानित कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के अधिकार छीने जा रहे हैं और आरक्षण के साथ खिलवाड़ हो रहा है। अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करें और 2027 के चुनाव की तैयारी में जुट जाएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर न्याय, सम्मान और सामाजिक न्याय का राज स्थापित होगा।
माघ मेले में साधु-संतों के साथ दुर्व्यवहार से अखिलेश यादव खफा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने माघ मेले में साधु-संतों और भक्तों के साथ दुर्व्यवहार को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मेले के नाम पर पचास हज़ार तक की रकम कमीशन के रूप में हड़पने का खेल चल रहा है। जिसके कारण साधु-संतों को सम्मान नहीं मिल रहा। उन्होंने भाजपा प्रशासन की मिलीभगत और कुशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि शाही-स्नान जैसी सनातनी परंपरा पर भी गत वर्ष और इस वर्ष विघ्न डाला गया, जो अक्षम्य है। उन्होंने इसे भाजपा के भ्रष्टाचार और नाकाम शासन का परिणाम बताया और कहा कि ऐसे मामलों में सच्चाई बोलने वाले भी सरेआम निशाने पर हैं।
बी-फार्मा छात्रों की फार्मेसिस्ट भर्ती में शामिल करने की मांग
सपा प्रमुख अखिलेश यादव से उत्तर प्रदेश फार्मेसी ग्रेजुएट एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल मिला।प्रतिनिधिमंडल ने बी-फार्मा के बेरोजगार छात्रों को यूपीएसएससी फार्मेसिस्ट भर्ती में शामिल करने का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि बी-फार्मा के छात्रों ने 4 वर्षीय पाठ्यक्रम पूरा किया है, जबकि उन्हें भर्ती में अयोग्य माना जा रहा है, और केवल डी-फार्मा छात्रों को शामिल किया जा रहा है। प्रदेश में 2002 के बाद फार्मेसिस्ट की कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई, जिससे बी-फार्मा बेरोजगार छात्रों की संख्या 4,50,000 तक बढ़ गई है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि यूपीएसएससी नियमावली में बदलाव कर उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
