प्रयागराज : मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर एक रोचक और चर्चा में रहने वाला घटनाक्रम सामने आया, जब अपने ही बनाए सिस्टम के तहत एक पूर्व आईजी को पुलिस बैरिकेडिंग पर रोक दिया गया। यह मामला उस समय का है, जब उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व आईजी और वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद काशी प्रांत के अध्यक्ष कविंद्र प्रताप सिंह अपने शिविर जा रहे थे।
घटना सोमवार करीब 11 बजे की है। पूर्व आईजी केपी सिंह अपनी इनोवा कार से मेला क्षेत्र में लगे विहिप के शिविर की ओर जा रहे थे। जैसे ही उनकी गाड़ी अलोपी मंदिर के आगे दारागंज बैरियर पर पहुंची, वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। ड्राइवर ने जाकर पुलिस को गाड़ी में बैठे साहब का परिचय दिया, लेकिन नियमों के तहत उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
करीब पांच मिनट बाद उन्हें आगे जाने दिया गया, लेकिन कुछ ही दूरी पर शास्त्री ब्रिज के नीचे बनी दूसरी बैरिकेडिंग पर पुलिस ने फिर उनकी गाड़ी रोक ली। इस बार तैनात सिपाही ने साफ शब्दों में कहा कि किसी को भी आगे नहीं जाने दिया जाएगा। ड्राइवर द्वारा बार-बार परिचय देने के बावजूद सिपाही अपनी बात पर अड़ा रहा।
इसके बाद पूर्व आईजी केपी सिंह खुद गाड़ी से उतरकर बैरिकेडिंग के पास पहुंचे और सिपाही को अपना परिचय दिया। उन्होंने कहा कि वे 2019 कुंभ की व्यवस्था संभाल चुके हैं और विहिप के शिविर में जा रहे हैं। इस पर सिपाही ने बेहद विनम्र लेकिन दृढ़ स्वर में कहा कि जो सिस्टम बनाया गया है, उसे सभी को समझना होगा और नियमों से कोई ऊपर नहीं है।
इस जवाब पर पूर्व आईजी मुस्कुराते नजर आए। इसी दौरान मौके पर पहुंचे अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें पहचान लिया, जिसके बाद बैरिकेडिंग हटाई गई और उन्हें पैदल आगे जाने की अनुमति दी गई। जाते समय सिपाही ने उन्हें सैल्यूट भी किया।
गौरतलब है कि मिर्जापुर निवासी केपी सिंह 1987 बैच के पीपीएस अधिकारी रहे हैं और वर्ष 2002 में उन्हें आईपीएस में प्रोन्नति मिली थी। 2012-13 और 2019 के कुंभ मेले में उनकी भूमिका बेहद सराहनीय रही। 34 वर्षों की सेवा में उन्होंने करीब 18 साल प्रयागराज में तैनाती दी और मिलनसार स्वभाव के कारण आमजन में भी लोकप्रिय रहे। यह घटना एक ओर जहां पुलिस के अनुशासन और सिस्टम की मजबूती को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर कानून के सामने सभी की समानता का भी संदेश देती है।
