किसान मजदूर एकता का ऐलान, जारी होगा ‘मुलतापी घोषणा पत्र- 2026
मुलतापी/लखनऊ: शहीद किसान अमर रहें और किसान-मजदूर एकता जिंदाबाद के नारों के बीच किसान संघर्ष समिति द्वारा 28वाँ शहीद किसान स्मृति सम्मेलन एवं 337वीं किसान महापंचायत का आयोजन 12 जनवरी, 2026, सोमवार को मुलतापी में किया जा रहा है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सम्मेलन के माध्यम से शहीद किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी और किसान-मजदूरों के अधिकारों को लेकर साझा संघर्ष की रणनीति तय की जाएगी। सम्मेलन की सबसे अहम उपलब्धि के रूप में ‘मुलतापी घोषणा पत्र-2026’ जारी किया जाएगा। जिसमें किसानों, मजदूरों, छात्रों और ग्रामीण समाज से जुड़े प्रमुख सवालों पर स्पष्ट मांगें रखी जाएंगी।
देश की जानी-मानी हस्तियां होंगी शामिल
इस मौके पर शहीद किसानों को पुष्पांजलि अर्पित करने और महापंचायत को संबोधित करने के लिए कई प्रमुख राष्ट्रीय हस्तियां मुलतापी पहुंच रही हैं, जिनमें तुषार गांधी (महात्मा गांधी के प्रपौत्र,अध्यक्ष-हम भारत के लोग), जस्टिस बी. जी. कोलसे पाटिल (पूर्व न्यायाधीश, बॉम्बे हाईकोर्ट), असीम रॉय (राष्ट्रीय महामंत्री, हिंद मजदूर किसान पंचायत) सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और किसान नेता शामिल होंगे।
ऐसे होगा कार्यक्रम
सुबह 9 बजे-शहीद किसान स्तंभ एवं शहीद मनोज चौरे स्मारक, परमंडल पर श्रद्धांजलि, सुबह 10 बजे किसान स्तंभ, बस स्टैंड, मुलतापी, सुबह 11 बजे से सायं 4 बजे तक शहीद किसान स्मृति सम्मेलन एवं 337वीं किसान महापंचायत होगी। इसके बाद विद्या नर्मदा मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा 30 उत्कृष्ट छात्र-छात्राओं को पुरस्कार दिया जाएगा।
किसान-मजदूर एकता का संकल्प
किसान संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि यह सम्मेलन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानी पर मिटने वालों की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि“शहीद किसानों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले- यही किसानी के लिए जान देने वालों की पहचान है।”सम्मेलन में खेती-किसानी के संकट, मजदूरों की बदहाल स्थिति, शिक्षा-रोजगार, भूमि अधिकार और कॉरपोरेट लूट जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी।
किसान, मजदूर और युवाओं को बुलावा
किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने देशभर के किसानों, मजदूरों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से परिवार सहित सम्मेलन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुलतापी की किसान महापंचायत हमेशा से अन्याय के खिलाफ संघर्ष की प्रतीक रही है और यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।
