संभल: उत्तर प्रदेश के संभल में 13 जुलाई 2018 को हुई जघन्य घटना के सात साल बाद अदालत ने चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1,07,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से दो लाख रुपये पीड़ित परिवार को दिए जाएंगे और शेष राशि सरकारी खजाने में जमा होगी। पीड़ित परिवार ने दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।
घटना का विवरण
संभल की तहसील गुन्नौर के थाना रजपुरा क्षेत्र के एक गांव में 25 वर्षीय महिला अपने दो छोटे बच्चों के साथ घर में थी। रात करीब ढाई बजे आरोपी जबरन घर में घुस आए और महिला के साथ बारी-बारी से हैवानियत की, जबकि उसकी 7 साल की बेटी सबकुछ देख रही थी। महिला बेहोश हो गई, और आरोपी फरार हो गए। बाद में महिला को जबरन घर से उठाकर मंदिर के हवन कुंड में जिंदा जला दिया गया।
पुलिस की शुरुआती लापरवाही और प्रशासनिक कार्रवाई
शुरुआती जांच में पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। घटना के सार्वजनिक होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तत्कालीन एसपी, थाना प्रभारी और पूरी चौकी को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद आईपीएस अधिकारी यमुना प्रसाद को संभल का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और दोषियों की पहचान

फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने आराम सिंह, भोना उर्फ कुंवरपाल, गुल्लू उर्फ जयवीर और महावीर को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। एक आरोपी नाबालिग होने के कारण उसका मामला अलग से चल रहा है।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद दोषियों ने खुद को निर्दोष बताया। वहीं, पीड़िता के ममेरे भाई ने कहा कि परिवार फैसले से संतुष्ट है, लेकिन ऊपरी अदालत में जाने पर विचार किया जाएगा।
