10 करोड़ की हरित परियोजना, शहर का अपना ‘ग्रीन टूरिज्म जोन’
बरेली : सीएम योगी आदित्यनाथ के हरित और ईको-फ्रेंडली विजन के तहत बरेली को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। शहर के सीबीगंज क्षेत्र में स्थित आरबोरेटम को नगर वन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म के एजेंडे में शामिल कर लिया गया है। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह नगर वन न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देगा, बल्कि पर्यटन, रोजगार और शहर की पहचान को भी नया आयाम देगा। सोमवार को लखनऊ में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में नगर वन की डिजाइन और लेआउट पर विस्तार से चर्चा हुई। कंसलटेंट एजेंसी द्वारा पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के जरिए परियोजना का पूरा खाका प्रस्तुत किया गया, जिसे वन मंत्री ने स्वीकृति दे दी। इसके बाद अब नगर वन परियोजना के धरातल पर उतरने का रास्ता साफ हो गया है।
ट्री-हाउस से कैफेटेरिया तक, ईको-फ्रेंडली सुविधाएं
नगर वन में पर्यावरण के अनुकूल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। जंगल के बीच लकड़ी से बने ट्री -हाउस, ईको-फ्रेंडली कैफेटेरिया, बच्चों के लिए किड्स पार्क और प्ले एरिया,परिवारों के लिए शांत भ्रमण स्थल, टहलने के लिए सुंदर पाथवे, औषधीय और हर्बल पौधों की वाटिकाएं तैयार की जाएंगी। युवाओं और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आकर्षक सेल्फी प्वाइंट भी बनाए जाएंगे।
दुर्लभ वृक्षों का संरक्षण, ज्ञान और जागरूकता का केंद्र
नगर वन को सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि ज्ञान और जागरूकता केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यहां मौजूद प्राचीन और दुर्लभ वृक्षों पर उनकी उपयोगिता और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। इससे पर्यटक और छात्र पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हो सकेंगे।
30 हेक्टेयर में फैला हरा खजाना
सीबीगंज का यह आरबोरेटम लगभग 30 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां चंदन, रुद्राक्ष, केवड़ा, शाल सहित श्रीलंका में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजातियों के वृक्ष मौजूद हैं। इसके अलावा बांस की कई प्रजातियां और ब्रिटिशकालीन दुर्लभ पेड़ इस क्षेत्र की विशेष पहचान हैं। पहले ही यहां मियावाकी वन विकसित किया जा चुका है और अब नगर वन योजना से यह इलाका ईको-टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।
आस्था, प्रकृति और पर्यटन का संगम
डीएफओ दीक्षा भंडारी ने मीडिया को बताया कि यूपी ईको-टूरिज्म के साथ हुई बैठक में नगर वन परियोजना को एजेंडे में रखा गया था, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है। नाथ कॉरिडोर पहले से निर्माणाधीन है और नगर वन के जुड़ने से बरेली में आस्था, प्रकृति और पर्यटन का मजबूत संगम तैयार होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
न पेड़ कटेंगे, न पक्का निर्माण
परियोजना की सबसे अहम बात यह है कि नगर वन में कोई पक्का निर्माण नहीं होगा और एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। मुख्य वन संरक्षक के निर्देशन में यहां वनस्पतियों पर शोध और प्रशिक्षण के लिए विशेष केंद्र भी विकसित किए जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र शिक्षा और अनुसंधान का भी हब बनेगा।
चार विभाग मिलकर बनाएंगे डीपीआर
नगर वन परियोजना में वन विभाग, पर्यटन विभाग, बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) और नगर निगम की संयुक्त सहभागिता रहेगी। सभी विभागों को मिलकर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कुल मिलाकर, सीबीगंज का नगर वन योगी सरकार के ईको-टूरिज्म मॉडल का मजबूत उदाहरण बनने जा रहा है, जो बरेली को पर्यावरण, पर्यटन और विकास- तीनों मोर्चों पर नई पहचान दिलाएगा।
