पटना : राजनीति में कई ऐसे दिन आते हैं, जो सिर्फ किसी व्यक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और राजनीतिक भविष्य के लिए अहम होते हैं। आज का दिन बिहार की राजनीति और राष्ट्रीय जनता दल के लिए कुछ ऐसा ही है। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पहले भी कई मामलों में सार्वजनिक जीवन की चुनौतियों का सामना कर चुके हैं चारा घोटाले से लेकर लैंड फॉर जॉब घोटाले तक। लेकिन आज की तारीख उनके और उनके परिवार के लिए विशेष है। लैंड फॉर जॉब मामले में चार्जशीट पर फैसले के बाद न केवल उनके राजनीतिक भविष्य की रूपरेखा बनेगी, बल्कि बिहार में विपक्ष की दशा और दिशा भी तय होगी।
बिहार विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव लगभग सीन से बाहर नजर आए। उनका परिवार बिखरा हुआ दिखा और विपक्ष की ताकत कमजोर पड़ती नजर आई। राजद के नेता और उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव, जो खुद नेता प्रतिपक्ष हैं, महत्वपूर्ण सत्रों में मौजूद नहीं थे। पटना स्थित राष्ट्रीय जनता दल कार्यालय के बाहर भी लालू प्रसाद यादव पूरी तरह गायब हैं।
आज दिल्ली की अदालत में इस मामले पर अहम फैसला आने वाला है। लालू प्रसाद यादव के साथ पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव भी नामजद हैं। आरोपों के मुताबिक, रेल मंत्री रहते लालू प्रसाद ने समूह-डी श्रेणी की नियुक्तियों के लिए जमीनों का इस्तेमाल किया। सीबीआई ने जो प्रमाण पेश किए हैं, उनके आधार पर अदालत को तय करना है कि आरोप पत्र दायर करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं या नहीं।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने पहले 10 नवंबर को सुनवाई के दौरान आदेश को 4 दिसंबर तक टाल दिया था। अगर अदालत इन प्रमाणों को पर्याप्त मानती है, तो लालू परिवार के राजनीतिक भविष्य पर सीधा असर पड़ेगा। यह सिर्फ परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि बिहार में विपक्ष के संगठनात्मक ढांचे और आगामी चुनाव रणनीतियों के लिए भी निर्णायक हो सकता है।
