लखनऊ : यूपी के ‘इटावा कथावाचन पीडीए अपमान कांड’ के पीड़ितों को मंगलवार को लखनऊ में सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया। समाजवादी पार्टी की ओर से न सिर्फ उन्हें सम्मान राशि दी गई, बल्कि जिस दृष्टिहीन कलाकार की ढोलक छीनी गई थी, उसे नई ढोलक भी भेंट की गई। इस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कथावाचन पर जातीय वर्चस्ववादी ताकतों का एकाधिकार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।“भागवत कथा तो सबके लिए है, जब सब सुन सकते हैं, तो सब बोल क्यों नहीं सकते?”। “अगर सच्चे कृष्ण भक्तों को कथा कहने से रोका जाएगा तो ये अपमान PDA समाज क्यों सहे?” “कुछ लोग कथावाचन को भावना नहीं, व्यवसाय बना चुके हैं, और वर्चस्ववादी ताकतें PDA समाज को दबाने में लगी हैं।”
जातीय वर्चस्व पर करारा प्रहार

एसपी चीफ अखिलेश यादव ने साफ कहा कि कथावाचन में प्रभुत्व बनाए रखने वाली ताकतें आज पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) समाज का मानसिक उत्पीड़न कर रही हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि “अगर इन कथावाचकों को PDA समाज से इतनी ही परेशानी है, तो वे PDA समाज से मिली दक्षिणा और चढ़ावा भी लेने से इनकार करें!” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार में जातीय भेदभाव और उत्पीड़न को संरक्षण मिल रहा है।
पीडीए समाज की चेतना से वर्चस्ववादी घबराए
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जैसे-जैसे PDA समाज में सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता बढ़ रही है, वैसे-वैसे वर्चस्ववादी शक्तियां मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए कथावाचन जैसे मंचों पर उत्पीड़न कर रही हैं।”भाजपा को अगर लगता है कि कथा कहने का अधिकार सिर्फ एक वर्ग का है, तो उसके लिए भी क़ानून बना कर दिखाए।” उन्होंने चेताया कि जिस दिन PDA समाज ने अपनी अलग कथा परंपरा शुरू की, “परंपरागत शक्तियों का साम्राज्य ढह जाएगा।”
जो पीड़ित, वो पीडीए
यह नारा एक सामाजिक चेतना को दर्शाता है कि भारत में उत्पीड़न का सामना करने वाला वर्ग ही आज सबसे अधिक जागरूक हो रहा है और सत्ता से सवाल पूछ रहा है।
