मुंबई : महाराष्ट्र में धार्मिक स्थलों पर ध्वनि सीमा को लेकर सख्ती के बीच, मुंबई की छह मस्जिदों ने एक अभिनव पहल करते हुए ‘ऑनलाइन अजान ऐप’ पर पंजीकरण कराया है। इस ऐप के माध्यम से नमाजियों को सही समय पर अजान की सूचना मोबाइल पर दी जाती है। यह निर्णय लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंधों और पुलिस चेतावनियों के बाद लिया गया है।
ऐसे काम करता है ऐप?
यह ऐप एंड्रॉइड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जब मस्जिद में अजान दी जाती है। उसी समय ऐप के माध्यम से प्रसारण ऑडियो सीधे उपयोगकर्ता तक पहुंचता है। रमजान या सार्वजनिक पाबंदियों के दौरान यह घर पर अजान सुनने का विकल्प बनता है। अब तक 500 से अधिक स्थानीय निवासी माहिम जुमा मस्जिद के ऐप से जुड़ चुके हैं।
मस्जिदों की ओर से यह बताया
माहिम जुमा मस्जिद के मुतवल्ली फहाद खलील पठान ने “The Justice Hindi ” को बताया कि यह ऐप धार्मिक परंपरा और कानूनी दिशा-निर्देशों के बीच संतुलन साधता है। उन्होंने कहा कि”हमने टकराव के बजाय नवाचार को चुना है। अब समुदाय तकनीक के जरिए भी अजान से जुड़ा रह सकता है।”
तकनीकी विकास और सत्यापन प्रक्रिया
यह ऐप तमिलनाडु के तिरुनेलवेली स्थित एक आईटी टीम द्वारा विकसित किया गया है। पंजीकरण के लिए मस्जिद का प्रमाण पत्र, अड्रेस प्रूफ और अज़ान देने वाले व्यक्ति का आधार कार्ड अनिवार्य है।
तमिलनाडु में अब तक 250 मस्जिद ऐप से जुड़ीं
कांग्रेस के मुंबई महासचिव आसिफ फारूकी ने मीडिया से इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि “नमाज जरूरी है, लाउडस्पीकर नहीं। तकनीक से जुड़ना समय की जरूरत है, तो “वहीं, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने दावा किया है कि उनके अभियान के चलते मुंबई में बिना अनुमति लगे 1,500 लाउडस्पीकर हटाए गए हैं। उन्होंने मस्जिदों में लाउडस्पीकर के खिलाफ लंबे समय से अभियान चला रखा है। ध्वनि सीमा पर कोर्ट का फैसला।
मुंबई हाईकोर्ट ने की थी धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की ध्वनि सीमा निर्धारित
पिछले दिनों मुंबई हाईकोर्ट ने धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की ध्वनि सीमा निर्धारित की थी। इसमें दिन में 55 डेसिबल,रात में 45 डेसिबल, फहाद पठान के अनुसार, मस्जिदों ने न्यायालय के दिशा-निर्देशों के पालन में स्वेच्छा से लाउडस्पीकर बंद कर दिए हैं, और अब बॉक्स स्पीकर जैसे वैकल्पिक उपाय अपनाए जा रहे हैं।
