बरेली : यूपी के बरेली में स्थित भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) से हाल ही में रिटायर हुए वरिष्ठ वैज्ञानिक से साइबर ठगों ने 1.29 करोड़ की ठगी की है। उन्होंने बताया कि 17 जून को एक व्हाट्सएप कॉल के जरिए इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड की शुरुआत हुई। कॉल करने वाले ने खुद को बंगलूरू सिटी पुलिस का अधिकारी बताया, और व्हाट्सएप डीपी पर पुलिस का लोगो लगा हुआ था। कॉलर ने कहा कि वैज्ञानिक का आधार कार्ड मानव तस्करी और धोखाधड़ी में इस्तेमाल हुआ है, और सदाकत खां नाम के आरोपी ने उनका नाम लिया है। पीड़ित वैज्ञानिक इस बात से बेहद घबरा गए और उसे असली पुलिस कॉल मान लिया।
CBI अधिकारी ‘दया नायक’ बनकर किया गया फर्जीवाड़ा
इसके बाद साइबर जालसाज़ ने एक और नंबर देकर कहा कि यह CBI अधिकारी दया नायक का नंबर है। वैज्ञानिक ने जब उस नंबर पर कॉल किया, तो दया नायक के नाम पर एक नकली अधिकारी उनसे जुड़ गया। उसने वैज्ञानिक को धमकाया कि उनके बैंक खातों में अवैध धन पाया गया है और इसकी जांच के लिए उन्हें अपना पूरा पैसा एक तयशुदा खाते में ट्रांसफर करना होगा। यह कहकर पूरी राशि 1.29 करोड़ धीरे-धीरे हड़प ली गई।
बैंक मैनेजर को भी नहीं बताई सच्चाई
जब पीड़ित द्वारा लगातार मोटी रकम ट्रांसफर की जा रही थी, तो बैंक मैनेजर ने शक जताया, लेकिन वैज्ञानिक डर और तनाव के कारण सच्चाई नहीं बता सके। एक हफ्ते तक यह मामला उन्होंने परिवार और किसी परिचित से भी नहीं साझा किया। अंततः उन्होंने साइबर क्राइम थाना, बरेली में इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा को पूरा घटनाक्रम बताया और केस दर्ज कराया।
पुलिस की कार्रवाई शुरू, खातों को कराया जा रहा फ्रीज़
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को ट्रैक करने में जुट गई है और ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए खातों को फ्रीज़ कराया जा रहा है। साइबर सेल ने आईपी एड्रेस ट्रैकिंग, कॉल रिकॉर्डिंग और बैंक ट्रांजैक्शन के ज़रिए मामले की गंभीर जांच शुरू कर दी है।
सबक, ऐसे बचें ऐसी ठगी से?
कभी भी पुलिस/CBI/सरकारी अधिकारी के नाम पर आए कॉल पर सीधे विश्वास न करें। कोई भी एजेंसी बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करवाने को नहीं कहती। अगर, डर लगे तो तुरंत अपने नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन (1930) पर संपर्क करें।
