लखनऊ/सीतापुर : यूपी के सीतापुर जिले में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी गिरने की घटना ने न केवल कार्य की गुणवत्ता, बल्कि प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन ने तत्काल बड़ी कार्रवाई की है।
कई इंजीनियरों पर गिरी गाज, एजेंसियां ब्लैकलिस्ट
घटना में लापरवाही सामने आने के बाद शासन ने जल निगम (ग्रामीण) के जूनियर इंजीनियर (JE) और सहायक अभियंता (AE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के JE और AE को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही निर्माण कार्य में लगी एजेंसी और थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने का नोटिस जारी किया गया है। निर्माण एजेंसी पर 5% लिक्विडेटेड डैमेज (LD) पेनाल्टी भी लगाई गई है। TPI एजेंसी के जिला इंचार्ज को भी पद से हटा दिया गया है।
जानें कैसे गिरी पानी की टंकी?
यह हादसा विकास खंड पहला के बेहमा चुनका गांव में हुआ। यहां जिंक एलम की पानी की टंकी जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई थी। यह टंकी अचानक भरभराकर गिर गई। गनीमत यह रही कि कोई बड़ा जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इससे निर्माण की गुणवत्ता और निरीक्षण प्रणाली की खामियां उजागर हो गईं।
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
घटना की गंभीरता को देखकर शासन ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है। इस कमेटी की अध्यक्षता जल निगम (ग्रामीण) के मुख्य अभियंता करेंगे। समिति में राज्य पेयजल मिशन के एक मुख्य अभियंता और एक अधीक्षण अभियंता को भी शामिल किया गया है। कमेटी को तीन दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।
16,000 में केवल 5 टंकी विफल, सरकार का दावा
राज्य सरकार ने दावा किया है कि जल जीवन मिशन योजना के तहत प्रदेश में अब तक 16,000 से अधिक पानी की टंकियों का सफल परीक्षण किया गया है। इसमें से केवल 5 टंकियों में ही तकनीकी खराबी या दुर्घटना की शिकायतें मिली हैं।सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों में लापरवाही को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस तरह की घटनाओं पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीतापुर की यह घटना केवल एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर चूक की ओर इशारा करती है। यह दर्शाता है कि केवल योजनाएं बनाना ही काफी नहीं, उनकी ईमानदारी से निगरानी और निष्पादन भी उतना ही ज़रूरी है।
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