लखनऊ : यूपी की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है। उन्हें चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन और हेट स्पीच (नफरती भाषण) मामले में दो साल की सजा सुनाई गई है। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मऊ विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया। रविवार के अवकाश के बावजूद सचिवालय खोला गया और चुनाव आयोग को विधिवत सूचना भेजी गई। इससे पहले यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री मुहम्मद आज़म खां की 2019 के एक हेट स्पीच मामले में दोषी करार होने के बाद सदस्यता रद्द की गई थी। उनको तीन साल की जेल और 2,000 का जुर्माना लगाया गया था। सजा के एक दिन बाद विधानसभा अध्यक्ष ने रामपुर शहर सीट से सदस्यता रद्द की। यहां उपचुनाव में भाजपा के आकाश सक्सेना ने जीत दर्ज की। इसके साथ ही उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम की भी जन्म प्रमाण पत्र के मामले में कोर्ट से फैसला आने के बाद रामपुर की स्वार विधानसभा से सदस्यता रद्द की गई थी। यहां से उपचुनाव में अपना दल के शफीक अहमद ने जीत दर्ज की थी। भाजपा के दुद्धी सीट से विधायक रामदुलार गौड़ की 5 दिसंबर, 2023 को कोर्ट से रेप के मामले में सजा होने के बाद अयोग्य के आधार पर सदस्यता रद्द की गई। 1 जून 2024 को उपचुनाव में सपा के विजय सिंह गोंड ने सीट जीती। कानपुर शहर की सीट से सपा विधायक हाजी इरफान सोलंकी की 2024 में 7 साल की सजा के बाद सदस्यता रद् की गई। हालांकि, उपचुनाव में उनकी पत्नी नसीम सोलंकी ने सीट जीतकर विधायकी बरकरार रखी। अब अब्बास अंसारी की सदस्यता रद्द की गई है।
अब्बास अंसारी को दो साल की सजा, 11 हजार का जुर्माना

यह मामला वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव प्रचार का है, जब मऊ से सुभासपा प्रत्याशी के रूप में अब्बास अंसारी ने एक जनसभा के दौरान प्रशासन के खिलाफ भड़काऊ बयान दिया था। सीजेएम कोर्ट (डॉ. केपी सिंह) ने शनिवार, 1 जून को सुनवाई पूरी कर उन्हें दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही विभिन्न धाराओं के तहत कुल 11 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
मंच से खुलेआम धमकी का आरोप
जनसभा में दिए गए भाषण में अब्बास अंसारी ने कहा था कि “चुनाव निपट जाने दो, प्रशासन से हिसाब-किताब बराबर किया जाएगा।” यह बयान मऊ के पहाड़पुर मैदान में 3 मार्च 2022 को एक जनसभा के दौरान दिया गया था। इसी को आधार बनाकर शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में अब्बास अंसारी समेत अन्य लोगों को भी नामजद किया गया था।
सह-आरोपी मंसूर अंसारी को भी सजा
अब्बास अंसारी के सहयोगी मंसूर अंसारी को भी इस केस में दोषी करार दिया गया है। धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत उन्हें 6 महीने की सजा और 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
विधानसभा सचिवालय में छुट्टी के दिन हुआ निर्णय
फैसले के बाद विधानसभा सचिवालय में रविवार को विशेष रूप से सचिवालय खोला गया, और तत्काल प्रभाव से मऊ सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। इस कार्रवाई की सूचना चुनाव आयोग को भी भेज दी गई है, जिससे कि उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
विधानसभा नियमों के तहत रद्द की गई सदस्यता
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 190(3) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। अब्बास अंसारी के मामले में भी यही प्रावधान लागू किया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और संभावित असर
अब्बास अंसारी की सदस्यता समाप्त होने से न केवल सुभासपा को बड़ा झटका लगा है, बल्कि मऊ सीट पर अब राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है। विपक्ष इस मामले को लेकर सत्तारूढ़ दल और गठबंधन पर निशाना साध सकता है।
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