बरेली। रमजान के मुकद्दस महीने की काफी फजीलत है। इस महीने में इस्लाम को मानने वाले लोग अल्लाह की इबादत करते हैं। मुसलमानों पर रमजान के रोजे फर्ज (जरूरी) हैं। इसके साथ ही नमाज, और जकात भी फर्ज है। मुसलमानों को पांच वक्त की नमाज पढ़नी है, लेकिन जकात हैसियत (मालदार लोगों) पर ही फर्ज की गई है। जकात देने की हैसियत रखने वाले मुसलमानों को अपनी कमाई (दौलत, ज्वेलरी, संपत्ति) में 2.50 फीसद हिस्सा गरीबों को देना होता है। यह जकात पहले अपने खानदान, रिश्तेदार, और पास पड़ोस के लोगों को देनी चाहिए। इसके बाद अन्य लोगों तलाशना चाहिए। रोजे में एक नेकी का सबाब 70 गुना है । इसलिए रोजदार के साथ ही अन्य लोग भी इबादत करते हैं। रात में सेहरी खाने के बाद फजर की नमाज, और कुरान की तिलाबत करते हैं। यह सिलसिला दिन भर चलता है। इफ्तार के बाद ईशा नमाज के साथ तरावीह (विशेष नमाज) पढ़ी जाती है। इसमें इमाम कुरान सुनाता है। हालांकि, बीमार व्यक्ति को रमजान में रोजा रखने की छूट है। किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार का रोग है, तो शरीयत ने उस व्यक्ति को रोजे से छूट दी है। बीमारी की हालत में रोजा न रखें, लेकिन शरीयत के मुताबिक जैसे ही शारीरिक रूप से स्वस्थ हो, तब पूरे साल के अंदर किसी भी महीने में छूटे गए रोजे पूरे करने का हुक्म है।
अल्लाह का शुक्र अदा करें
अल्लाह शुक्र अदा करने वालों से काफी खुश होता है। इसलिए अल्लाह ने जो दिया। उसका शुक्र अदा करना चाहिए। रमजान के महीने में अल्लाह की इबादत के साथ ही शुक्र जरूर अदा करें।
मोबाइल से दूर रहने की नसीहत
रमजान में अल्लाह की इबादत करनी चाहिए। शरीयत के मुताबिक रोजेदार इबादत भी करें, और रोजा भी रखें। उलमा ने खासकर युवाओं से अपील कर कहा कि जिस तरह से आजकल का युवा मोबाइल की दुनिया में पागल हुआ जा रहा है। रमजान के महीने में युवा मोबाइल से दूर रहकर रमजान के महीने में अल्लाह की इबादत करें।
रोजदार इन बातों का रखें ख्याल
रोजादार को सेहरी के बाद से इफ्तार तक कुछ नहीं खाना है, और न ही पीना है। रोजे के दौरान जबरन उल्टी न करें, इससे आपका रोजा टूट सकता है। अगर, आपने रोजा रखा है, तो इस दौरान आपको गाने, झूठ, गाली आदि से भी बचना है। किसी की गीबत (चुंगली), बुराई, किसी के दिल को ठेस नहीं पहुंचानी है।
