सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, आत्मनिर्भरता का नारा खोखला, सरकार बना रही है विदेशी कंपनियों का एजेंट, मैन्युफैक्चरिंग के गिरने से बढ़ी बेरोजगारी और आय की असमानता
लखनऊ : सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर केंद्र की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश में असंतुलित विकास और आय की असमानता की असली वजह यह है कि मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के बड़े कारोबारी घराने अब ट्रेडिंग (खरीद-बिक्री) पर ही फोकस कर रहे हैं। जिससे न सिर्फ स्थानीय स्किल, हुनर और कच्चे माल की अहमियत घट रही है, बल्कि रोज़गार के अवसर भी तेजी से खत्म हो रहे हैं।
आत्मनिर्भरता की आड़ में विदेशी निर्भरता
सपा प्रमुख ने कहा कि सरकार मंच से ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बात करती है, लेकिन पीछे से विदेशी कंपनियों के साथ सौदे करती है। सरकार की प्राथमिकता देश के भीतर उत्पादन नहीं, बल्कि विदेशों से बना बनाया सामान और सर्विस इंपोर्ट कर उसे बेचना बन गई है। “देश की अर्थव्यवस्था बने- बनाए माल मंगाने से नहीं, देश के अंदर उत्पादन बढ़ाने से सशक्त होगी।”
आर्थिक असमानता और बढ़ती खाई पर चिंता
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों ने अमीरों को और अमीर और गरीबों को और गरीब बना दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ GDP और ट्रिलियन डॉलर की बातें करती है, लेकिन असल प्रगति तब मानी जाएगी जब आम आदमी की आय बढ़े और समाज में आर्थिक असमानता कम हो।“ट्रिलियन डॉलर का सपना दिखाकर सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटका रही है। प्रति व्यक्ति आय और सामाजिक न्याय ही असली समृद्धि का मापदंड होना चाहिए।”
सरकार की नीतियां फेल, जनता ठगी महसूस कर रही है
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। महंगाई लगातार बढ़ रही है। किसान, नौजवान और व्यापारी सभी हताश हैं। बेरोजगारी चरम पर है। देश का निर्माण क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) संकट में है। “यदि सरकार खुद ही हाथी के दांत जैसी हो जाएगी, दिखाने के कुछ, करने के कुछ, तो देश का क्या होगा?”
समाजवादी पार्टी की मांगें और सुझाव
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को पुनर्जीवित किया जाए। रोज़गार के अवसर पैदा किए जाएं। विदेशी कंपनियों की निर्भरता कम की जाए। आर्थिक असमानता दूर करने के लिए विशेष योजनाएं लाई जाएं
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