बरेली। पुलिस की एक और बड़ी सफलता ने अपराधियों की नींद उड़ा दी है। एसएसपी अनुराग आर्य के नेतृत्व में बरेली पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया जो ट्रक चोरी, फर्जी मुकदमे और फाइनेंस कंपनियों से क्लेम के जरिए करोड़ों की ठगी करता था। शहर के थाना कैंट पुलिस की टीम ने वर्षों से सक्रिय ट्रक चोरों के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जिसने अब तक 50 से अधिक ट्रक चोरी कर करीब 6 करोड़ रुपये के फर्जी क्लेम निकाले। यह गिरोह न केवल ट्रक चुराता था, बल्कि मालिकों को लालच देकर उनके नाम पर फर्जी मुकदमे कोर्ट से दर्ज करवाता और फिर बीमा/फाइनेंस कंपनियों से क्लेम वसूलता था। एसएसपी ने जैसे ही गैंग की गतिविधियों को भांपा। उन्होंने निर्देश दिए कि सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, नेटवर्क को काटकर फेंकना है। इसके बाद एसपी सिटी मानुष पारीक, सीओ पंकज श्रीवास्तव और थाना कैंट प्रभारी की अगुवाई में एक विशेष टीम बनाई गई जिसने तकनीकी निगरानी, मुखबिरों और इंटर-डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस का सहारा लिया।
एसपी सिटी ने बताया कि पकड़ा गया अभियुक्त शाकिर उर्फ भूरा मास्टर गैंग का मास्टरमाइंड था, आरिफ ट्रक चोरी में सहयोग करता, सोहेल ट्रकों के चेसिस नंबर मिटाकर बॉडी में फेरबदल करता, सैफउद्दीन नए शिकार की तलाश में साजिशकर्ता, ईशाक अली फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर क्लेम लेने में माहिर था और फरार आरोपी बाबू इंजन व चेसिस नंबर बदलने में माहिर था। गिरोह आरटीओ कार्यालय से मिलकर फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर बनवाता, जिससे चोरी के ट्रकों को वैध बताया जा सके। बाद में इन्हें या तो कबाड़ में बेच दिया जाता या फर्जी दस्तावेजों के साथ अन्य लोगों को। जांच में सामने आया कि गिरोह ने बरेली की अदालतों में 52 से अधिक फर्जी मुकदमे दर्ज करवाए, जिनमें से 20 में एफआर लग चुकी है, 17 में केस एक्सपंज हो चुके हैं, 3 में चार्जशीट दाखिल है और 12 मुकदमे अभी जांच में हैं। हर केस से औसतन 15 लाख रुपये का क्लेम निकाला गया।
तकनीकी जांच से खुली परतें
ईशाक अली के मोबाइल से मिले व्हाट्सएप चैट्स और ट्रकों से बरामद फर्जी नंबर प्लेटों ने जांच को दिशा दी। इससे साबित हुआ कि गैंग कोर्ट, आरटीओ और बीमा कंपनियों तक को धोखा देने में सक्षम था।
