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कोटद्वार/दिल्ली : उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के हत्यारों को आखिरकार अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाकर न्याय की बुनियाद को और मजबूत किया है। कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने शुक्रवार को इस बहुचर्चित मामले में तीनों दोषियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। तीनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उम्रकैद के साथ जुर्माना और पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है। यह फैसला अंकिता के परिवार और देशभर के उन लाखों लोगों के लिए इंसाफ की प्रतीक बनकर सामने आया है, जो बीते करीब दो वर्षों से इस केस में सख्त सजा की मांग कर रहे थे।
क्या था अंकिता भंडारी हत्याकांड?

सितंबर 2022 में अंकिता भंडारी, जो ऋषिकेश के पास एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्यरत थी। आरोप है कि रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से ग्राहकों को “अवैध सेवा” देने से इनकार करने पर हत्या कर दी गई थी। उसे नहर में धक्का देकर मार दिया गया और मामला दबाने की कोशिश की गई। इस निर्मम हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
उम्रकैद और आजीवन कारावास में क्या होता है अंतर?

अदालत ने तीनों दोषियों को “उम्रकैद” की सजा सुनाई है। अब सवाल उठता है। क्या “उम्रकैद” और “आजीवन कारावास” अलग-अलग हैं? कानूनी रूप से दोनों एक ही हैं। उम्रकैद और आजीवन कारावास दोनों का मतलब है कि अपराधी को शेष जीवन तक जेल में रहना होगा। यह धारणा गलत है कि उम्रकैद का मतलब सिर्फ 14 या 20 साल की सजा है। हकीकत में यह आजन्म कारावास है। हालांकि, राज्य सरकारें 14 साल बाद कैदी के व्यवहार के आधार पर रिहा करने का निर्णय ले सकती हैं।
सजा कम कब हो सकती है?
यदि दोषी का आचरण जेल में सुधारात्मक पाया जाए, तो राज्य सरकार सजा कम करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। लेकिन जघन्य अपराध (जैसे हत्या, बलात्कार, देशद्रोह) में सजा माफ करना या कम करना मुश्किल होता है।
परिवार की प्रतिक्रिया और जनभावना
अंकिता के परिजनों ने फैसले के बाद आंसू भरी आंखों से संतोष जताया। उनके अनुसार, “हमें अब जाकर थोड़ा सुकून मिला है, लेकिन बेटी को हम वापस नहीं ला सकते।”देशभर में इस फैसले को लेकर न्यायपालिका की तारीफ हो रही है। सोशल मीडिया पर #JusticeForAnkita फिर से ट्रेंड कर रहा है।
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