पुलिस ने कहा- “सिर्फ संदिग्ध मुखबिर से हुई पूछताछ, किसी निर्दोष को नहीं फंसाया गया” जानें फिर क्यों मचा सियासी भूचाल
अमेठी/लखनऊ : यूपी की कानून व्यवस्था एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गई है। अमेठी जिले के मुसाफिरखाना थाने के दरोगा हेम नारायण सिंह का एक कथित ऑडियो वायरल हुआ है,। जिसमें वह “315 बोर का कट्टा लाने” की बात करते सुनाई दे रहे हैं, ताकि कथित रूप से “पंडित जी को जेल भेजा जा सके”। इस ऑडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बवाल मच गया, और विपक्षी दलों ने इसे “ब्राह्मण विरोधी मानसिकता” से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद अब अमेठी पुलिस ने आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर पूरे मामले में सफाई दी है, और वायरल ऑडियो को संदिग्ध बताते हुए इसे “पूरी तरह गलत संदर्भ में पेश किया गया” करार दिया है।
पुलिस की सफाई, “पूछताछ हुई, फर्जी फंसाने का कोई सवाल ही नहीं”

प्रेस विज्ञप्ति में अमेठी पुलिस ने स्पष्ट रूप से कहा है कि “ऑडियो में जिस मुखबिर हिमांशु पुत्र यशलाल की बात हो रही है। वह ग्राम निजामुद्दीनपुर का निवासी है और उसकी गतिविधियाँ कुछ समय से संदिग्ध थीं। इसी कारण उसे दिनांक 08.05.2025 को पूछताछ के लिए मुसाफिरखाना थाने बुलाया गया था। जीडी में विधिवत एंट्री की गई और पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया। पुलिस ने यह भी कहा कि “ऑडियो में जिन अन्य व्यक्तियों की चर्चा है। उनसे संबंधित किसी भी व्यक्ति को न तो थाने बुलाया गया और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है।”
राजनीतिक भूचाल, अखिलेश यादव का बड़ा हमला

ऑडियो वायरल होते ही समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर यूपी पुलिस और सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा “यह DGP साहब के स्वागत में उप्र पुलिस की ईमानदारी का स्तुति संवाद है। AI से छेड़छाड़ का बहाना अब नहीं चलेगा। अब तो न्याय करके दिखाना होगा।”उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश में जाति के आधार पर पुलिस कार्रवाई को निर्देशित किया जा रहा है?
जनता में गहराया अविश्वास या गलतफहमी?

इस विवाद के बाद आम जनता के मन में एक बार फिर सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या वर्दीधारी अफसर कानून का दुरुपयोग कर सकते हैं?।हालांकि अमेठी पुलिस का कहना है कि वायरल ऑडियो की विधिवत जांच की जा रही है, और अगर कोई गलत कार्यवाही सामने आती है, तो उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
क्या कहती है वायरल तस्वीर?
पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में यह भी बताया गया है कि पूरे घटनाक्रम की वीडियो निगरानी और दस्तावेजी रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, जो यह साबित करती है कि किसी भी निर्दोष को प्रताड़ित नहीं किया गया।
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