प्रयागराज: उत्तर प्रदेश विधान परिषद के एमएलसी चुनाव 2026 की मतदाता सूची और वोटर पर्चियों में अजीबोगरीब प्रविष्टियों का मामला सामने आया है। इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की कुछ पर्चियों में मतदाताओं के नाम, पिता के नाम और पते के कॉलम में ऐसी गलतियां दर्ज मिली हैं, जिन्होंने निर्वाचन व्यवस्था के आंकड़ों के सत्यापन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं मतदाता के नाम के आगे असंबंधित वाक्य छपे हैं, तो कहीं पिता के नाम की जगह शैक्षिक डिग्री दर्ज हो गई है। मामला सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी किए हैं।
कहीं ‘टक्कर मारना’ तो कहीं ‘राम ने यादव को मारा’ दर्ज

इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सामने आई मतदाता पर्चियों में नामों से जुड़ी कई अजीब प्रविष्टियां दर्ज होने की बात कही गई है। कुछ पर्चियों पर मतदाताओं के नाम के साथ ‘खालिद अली ने कहा’, ‘फैज अब्बास ने कहा’, ‘इरफान अली ने कहा’, ‘सुवैव कहा’ और ‘टक्कर मारना’ जैसे शब्द छपे मिले। एक अन्य पर्ची में मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ और पिता का नाम ‘मूर्ख चंद्र यादव’ दर्ज होने की बात सामने आई है। इन प्रविष्टियों ने मतदाता विवरण तैयार करने और उनका सत्यापन करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
पिता के नाम की जगह बीकॉम, पते में भी छपी गलत जानकारी

गड़बड़ियां केवल मतदाताओं के नाम तक सीमित नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक, झांसी के एक मतदाता नरेंद्र यादव की पर्ची में पिता के नाम वाले कॉलम में किसी व्यक्ति के नाम के बजाय ‘बीकॉम’ दर्ज हो गया। एक अन्य पर्ची में पिता के नाम की जगह ‘टक्कर मारना’ छपा मिला। वहीं, प्रयागराज छावनी क्षेत्र की एक महिला मतदाता की पर्ची में पते के कॉलम में ‘प्रयागराज नहीं कर सकता’ जैसा असंबंधित वाक्य छपने की बात सामने आई है। इन उदाहरणों के बाद मतदाता पर्चियों में दर्ज जानकारी की शुद्धता और डिजिटल व्यवस्था में आंकड़ों के सत्यापन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताई गलती की संख्या, अधिकारियों को दिए निर्देश
विवाद सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट की। उनके अनुसार, कुल 14.8 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से 150 से कम मतदाताओं के नाम या अभिभावक के विवरण में छपाई संबंधी त्रुटियां मिली हैं। यह कुल मतदाता संख्या का 0.01 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की पूरी प्रक्रिया को जिलेवार मैन्युअल व्यवस्था से हटाकर डिजिटल मंच पर स्थानांतरित किया गया है। निर्वाचन कार्यालय की सूचना प्रौद्योगिकी टीम ने तकनीकी सहयोग से इस व्यवस्था को चार महीने में तैयार किया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अफसरों के साथ हुई ऑनलाइन बैठक में सोशल मीडिया और राजनीतिक दलों से मिली शिकायतों पर संज्ञान लिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी योग्य मतदाता को केवल छपाई या लिपिकीय गलती के आधार पर मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाए। अब इन त्रुटियों को दूर करने और पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए अधिकारियों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
