बदायूं : इस्लामनगर थाना क्षेत्र के ब्योर कासिमाबाद गांव में शुक्रवार को उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई, जब प्रभात फेरी निकालने को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच टकराव हो गया। फेरी के रूट को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते धक्का-मुक्की और हंगामे में बदल गया। ग्रामीणों ने पुलिस पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस दौरान महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पिछले करीब 50 वर्षों से प्रभात फेरी निकाली जाती रही है। शुक्रवार सुबह भी परंपरा के अनुसार प्रभात फेरी निकाली जा रही थी, लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही उसे रोक दिया। पुलिस का कहना था कि जिस मार्ग से फेरी निकाली जा रही है, वह विवादित है और वहां से फेरी की अनुमति नहीं है। इसी बात को लेकर ग्रामीणों और पुलिस के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2012 में तत्कालीन सपा सरकार के दौरान मुस्लिम पक्ष की आपत्ति के बाद प्रभात फेरी का रूट बदल दिया गया था। इस बार ग्रामीण पुराने रूट से ही फेरी निकालने पर अड़े थे। रूट को लेकर पुलिस को पहले से शिकायत मिली थी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और फेरी को रोक दिया।
फेरी रोके जाने से ग्रामीण भड़क गए और पुलिस से बहस करने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। करीब एक घंटे तक गांव में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने हालात काबू में करने के नाम पर लाठीचार्ज किया, जिससे कई लोग गिर पड़े और अफरा-तफरी मच गई।
मामले की सूचना मिलते ही एसपी देहात डॉ. हृदयेश कठेरिया और एसडीएम बिसौली राशि कृष्णा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और पुलिस कर्मियों से बात कर स्थिति को शांत कराया। काफी समझाइश के बाद प्रशासन की निगरानी में प्रभात फेरी को आगे बढ़ाया गया।
फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी पक्ष को शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं, ग्रामीण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
