कंगना रनौत से जुबानी जंग पर स्वामी रामदेव का पलटवार, बोले- ओछे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता
बिना नाम लिए कंगना रनौत पर साधा निशाना, बोले- स्वामी रामदेव क्या है और योगदान क्या है, यह देश जानता है; एक साथ चुनाव को बताया शिक्षा और विकास के लिए फायदेमंद
नई दिल्ली: कंगना रनौत और स्वामी रामदेव के बीच चल रही जुबानी जंग के बीच योग गुरु स्वामी रामदेव ने एक बार फिर पलटवार किया है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए रामदेव ने बिना नाम लिए कहा कि वह विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने अपने योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि स्वामी रामदेव क्या हैं और उनका योगदान क्या है, यह पूरा देश जानता है।
बिना नाम लिए बोले- ओछे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता
मीडिया से बातचीत के दौरान जब स्वामी रामदेव से कंगना रनौत से जुड़े विवाद को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे उनका नाम नहीं लिया। रामदेव ने कहा कि वह इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं बोलना चाहते, क्योंकि वह विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा कि देश स्वामी रामदेव के बारे में और उनके योगदान के बारे में अच्छी तरह जानता है। इसी के साथ उन्होंने बिना नाम लिए संबंधित व्यक्ति को लेकर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।
सरकारी नौकरी में गड़बड़ी को लेकर शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, कुछ दिनों पहले स्वामी रामदेव ने सरकारी नौकरियों के साक्षात्कार में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद कंगना रनौत ने रामदेव की आंदोलन की चेतावनी पर तंज कसा था। इसी के बाद दोनों के बीच जुबानी बयानबाजी शुरू हो गई थी। अब रामदेव के ताजा बयान को इसी विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
एक साथ चुनाव से शिक्षा और विकास को मिलेगा फायदा
वहीं, स्वामी रामदेव ने ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि देश में एक साथ चुनाव होते हैं तो शिक्षा और विकास के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रामदेव के मुताबिक, बार-बार होने वाले चुनावों में साल के कई महीने चुनावी प्रक्रिया में निकल जाते हैं। इसका असर सरकारी कामकाज पर भी पड़ता है।
शिक्षकों को बच्चों के लिए ज्यादा समय मिलेगा
स्वामी रामदेव ने कहा कि चुनाव के दौरान शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। इससे शिक्षा व्यवस्था और विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव होने की स्थिति में शिक्षक बच्चों को अधिक समय दे सकेंगे और सरकारी मशीनरी भी विकास कार्यों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर पाएगी। उनके मुताबिक, इससे शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ विकास की गति को भी बढ़ावा मिल सकता है।
