राम मंदिर चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से क्यों किया इनकार? क्या बढ़ेंगी ट्रस्ट की मुश्किलें?
इतनी जल्दबाजी क्यों?’ सुप्रीम कोर्ट का याचिकाकर्ता से सवाल, अवकाश के बाद होगी सुनवाई, सीबीआई जांच की मांग पर फिलहाल नहीं मिली राहत
अयोध्या/नई दिल्ली : अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं से मिले चंदे में कथित वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आखिर इस मामले में इतनी जल्दबाजी क्यों है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अवकाश समाप्त होने के बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा। इस फैसले के बाद राम मंदिर ट्रस्ट, चंदे के उपयोग और जांच की मांग को लेकर चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
सीबीआई की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता ने राम मंदिर में मिले चंदे के कथित गबन की जांच के लिए सीबीआई की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि आरोप बेहद गंभीर हैं और राज्य सरकार की ओर से की जा रही कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुंदरश ने पूछा, “इस मामले में इतनी जल्दबाजी क्या है?” इसके बाद अदालत ने कहा कि न्यायालय दोबारा खुलने के बाद इस याचिका पर सुनवाई की जाएगी।
क्या है पूरा राम मंदिर चंदा विवाद?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले चंदे के उपयोग और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध और पेशेवर जांच कराने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और दानदाताओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शी जांच आवश्यक है। हालांकि, अभी तक इन आरोपों पर किसी अदालत ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
केंद्र और यूपी सरकार से क्या मांग की गई?
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्देश देने की मांग की गई है कि मंदिर को मिलने वाले चंदे की निगरानी, ऑडिट और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से भी जुड़ा है।
पहले से चल रही है एसआईटी जांच
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एक एसआईटी का गठन किया था। इस जांच टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। एसआईटी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि बिना एफआईआर दर्ज किए जांच शुरू की गई, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
अब क्या होगा आगे?
सुप्रीम कोर्ट के तत्काल सुनवाई से इनकार करने के बाद अब यह मामला अदालत के अवकाश समाप्त होने के बाद सूचीबद्ध होगा। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी अपनी जांच जारी रखेगी। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है।
