कानपुर : सोमवार को उस वक्त सनसनी फैल गई जब दवा कारोबारी आलोक मिश्रा के 16 वर्षीय बेटे आरव मिश्रा ने घर में फंदा लगाकर जान दे दी। आरव द जैन इंटरनेशनल स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ता था और स्टेट लेवल का स्विमिंग खिलाड़ी था। 10वीं में उसने 97 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
घटना के समय घर में आरव की दादी मौजूद थीं। शाम करीब साढ़े चार बजे जब उन्होंने आरव को आवाज दी तो कोई जवाब नहीं मिला। दरवाजा अंदर से बंद था। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया, तो आरव पंखे से लटका मिला। यह देखकर दादी बेहोश होकर गिर पड़ीं।
‘नोट फॉर मोबाइल’—जेब से मिला कागज
फॉरेंसिक टीम को उसकी जेब से एक कागज मिला जिस पर लिखा था—“नोट फॉर मोबाइल।”
मोबाइल के नोटपैड में अंग्रेज़ी में लिखा मिला—
“चार चेहरे कहते हैं कि खुद जान दे दो या मां-बाप और बहन को मार दो…”
परिजनों के अनुसार, दीपावली के समय आरव ने यह मानसिक परेशानी अपनी बहन को बताई थी, लेकिन घर में त्योहार और छठ पूजा की तैयारी होने के कारण उसने इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। इसी बीच माता-पिता छठ पूजा के लिए भागलपुर चले गए थे।
सीजोफ्रेनिया से जूझ रहा था आरव
जांच में सामने आया कि आरव एक साल से सीजोफ्रेनिया के लक्षण महसूस कर रहा था और इंटरनेट पर बार-बार अपनी बीमारी सर्च कर जानकारी जुटाता था। पुलिस का कहना है कि परिजनों ने किसी पर आरोप नहीं लगाया है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञों ने बताया कि सीजोफ्रेनिया के मरीजों में मतिभ्रम और ‘आदेशात्मक आवाजें’ सुनाई देना आम होता है—जो कई बार आत्महत्या या दूसरों पर हमला करने जैसे खतरनाक कदम के लिए उकसाती हैं।
डॉक्टर्स के अनुसार शुरुआती लक्षण—
लोगों से कटकर रहना
चुप्पी साध लेना
काम में रुचि न लेना
खुद से बड़बड़ाना
अव्यवस्थित व्यवहार
ऐसे संकेत मिलते ही परिवार को सतर्क होकर तुरंत मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि समय पर उपचार से यह बीमारी नियंत्रित की जा सकती है।
