शाहजहांपुर : खुटार क्षेत्र में एक साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है। दुष्कर्म के आरोपी को निर्दोष बताते हुए उसके गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने गुरुवार को चांदपुर पुलिस चौकी का घेराव कर दिया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहे। ग्रामीणों ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाते हुए आरोपी को न्याय दिलाने की मांग की। करीब तीन घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस और ग्रामीणों के बीच टकराव हो गया। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया, जिसके बाद भगदड़ और पथराव की स्थिति बन गई।
मामला नौ जून को दर्ज हुए एक गंभीर अपराध से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार एक साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद हरनाई गांव निवासी गुड्डू शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस का दावा है कि आरोपी को पकड़ने के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें उसके दोनों पैरों में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
हालांकि आरोपी के गांव हरनाई के लोगों का दावा कुछ और है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस दिन घटना हुई, उसी शाम गांव के पूर्व प्रधान ने गुड्डू शर्मा को पुलिस के हवाले कर दिया था। ग्रामीणों के मुताबिक आरोपी पहले से ही पुलिस की हिरासत में था, इसलिए बाद में दिखाई गई मुठभेड़ वास्तविक नहीं बल्कि फर्जी थी। इसी आरोप को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण चांदपुर पुलिस चौकी पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। महिलाओं और बच्चों ने भी पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और यदि आरोपी निर्दोष है तो उसे न्याय मिले। ग्रामीणों ने पुलिस पर जल्दबाजी में कार्रवाई करने और फर्जी मुठभेड़ दिखाने का आरोप लगाया।
सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। ग्रामीण अपने आरोपों पर अड़े रहे और चौकी के बाहर धरना देकर नारेबाजी करते रहे।
स्थिति तब बिगड़ गई जब पुलिस ने प्रदर्शन समाप्त कराने के लिए सख्ती दिखानी शुरू की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठी फटकारनी शुरू कर दी, जिससे मौके पर भगदड़ मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा और उन्हें भी बल प्रयोग का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन उग्र हो गया था और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर पथराव किए जाने की भी सूचना है। बताया जा रहा है कि कई पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों को मामूली चोटें आई हैं।
घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की, भगदड़ और हंगामे के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो के सामने आने के बाद मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया है। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी। वहीं ग्रामीण आरोपी को निर्दोष बताते हुए न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं। अब सबकी नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
