नई दिल्ली : राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे में कथित चोरी और हेराफेरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की पुलिस जांच पूरी हो चुकी है और विशेष जांच दल (एसआईटी) संबंधित अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर चुका है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को मामले की सुनवाई के दौरान अयोध्या की स्थानीय अदालत के सामने अपना पक्ष रखने को कहा।
निचली अदालत को कानून के मुताबिक कार्रवाई के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, इसलिए निचली अदालत कानून के अनुसार उस पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष और उचित कार्रवाई करे। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को भी अपनी बात स्थानीय अदालत के सामने रखने की छूट दी है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया।
एसआईटी ने जांच पूरी कर दाखिल की चार्जशीट
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस की ओर से बताया गया कि मामले की विस्तृत जांच एसआईटी ने पूरी कर ली है। जांच के बाद संबंधित अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। इससे पहले 21 सितंबर को हुई सुनवाई में भी उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी थी कि एसआईटी की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और दो दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
राम मंदिर की जमीन से जुड़ी नई याचिका पर विचार से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने एक नई याचिका पर विचार करने से भी इनकार कर दिया। इस याचिका में यह पता लगाने का अनुरोध किया गया था कि क्या राम मंदिर उसी जमीन पर बनाया गया है, जिस पर मुख्य अयोध्या विवाद मामले में फैसला सुनाया गया था। अदालत ने इस मांग पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
चार अलग-अलग याचिकाएं हुई थीं दाखिल
इस मामले में कुल चार याचिकाएं दायर की गई थीं। इनमें अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दाखिल रिट याचिका और अजय कुमार राय की क्रिमिनल रिट याचिका शामिल थी। अजय कुमार राय ने इस मामले में स्वयं अपना पक्ष रखा था। इसके अलावा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने भी अलग याचिका दाखिल की थी, जबकि एक अन्य याचिका हिंदू धर्म परिषद की ओर से दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले से जुड़े पक्षकार अयोध्या की स्थानीय अदालत में अपनी बात रख सकेंगे।
