एनसीपी शरद गुट के 8 सांसद आज पीएम मोदी से मिलेंगे, महिला आरक्षण पर कांग्रेस ने रखी बड़ी मांग
महाराष्ट्र के किसानों, पानी के संकट और शहरीकरण से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के सामने महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से अलग रखने की अपील की
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद गुट के आठ सांसद सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाले हैं। प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री के सामने महाराष्ट्र से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाएगा। इनमें किसानों की आत्महत्या, पानी का संकट और तेजी से बढ़ते शहरीकरण से पैदा हो रही समस्याएं शामिल हैं। इस मुलाकात से पहले कांग्रेस ने अपने सहयोगी दल एनसीपी के शरद गुट से प्रधानमंत्री के सामने इंडिया गठबंधन का स्पष्ट रुख रखने की अपील की है। कांग्रेस ने विशेष रूप से महिला आरक्षण कानून को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखते हुए उसे तत्काल लागू करने की मांग उठाने को कहा है।
कांग्रेस ने एनसीपी शरद गुट से क्या कहा?
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव सचिन सावंत ने एनसीपी शरद गुट के सांसदों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने की मांग रखने का आग्रह किया है। सचिन सावंत ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू किया जाना चाहिए और इसे परिसीमन की प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन का रुख पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए।
महिला आरक्षण पर विपक्ष का एकजुट रुख
कांग्रेस का कहना है कि महिला आरक्षण कानून लागू करने के मुद्दे पर विपक्षी दलों का एकजुट रहना जरूरी है। पार्टी ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ जोड़ने के बजाय इसे अलग प्रक्रिया के तहत तत्काल लागू किया जाना चाहिए। सचिन सावंत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने विपक्ष की एकता और उसके रुख को स्पष्ट रखने पर जोर दिया।
एनसीपी के 8 सांसद पीएम मोदी से क्यों मिलेंगे?
एनसीपी शरद गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने शनिवार को बताया था कि पार्टी के आठ सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान महाराष्ट्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रधानमंत्री के सामने रखा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल किसानों की आत्महत्या, पानी की समस्या और तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण पैदा हो रही परेशानियों पर चर्चा करेगा। सुप्रिया सुले के मुताबिक, महाराष्ट्र की मौजूदा समस्याओं को प्रधानमंत्री के संज्ञान में लाना जरूरी है, ताकि केंद्र स्तर पर इन मुद्दों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर क्या है विवाद?
महिला आरक्षण कानून को लागू करने की प्रक्रिया को परिसीमन से जोड़ने को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने की शर्त से अलग किया जाए। विपक्षी दलों का तर्क है कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए इसे लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
850 लोकसभा सीटों का प्रस्ताव
प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने का प्रावधान रखा गया था। हालांकि, विधेयक संसद में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का समर्थन हासिल नहीं कर सका। इसके चलते विधेयक पारित नहीं हो पाया।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस और विपक्ष की मांग
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल महिला आरक्षण कानून का समर्थन करते रहे हैं। हालांकि, उनका विरोध इस बात को लेकर है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। विपक्ष की मांग है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को बिना किसी अतिरिक्त शर्त के जल्द लागू किया जाए। एनसीपी शरद गुट के सांसदों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने वाली मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब महिला आरक्षण, परिसीमन और महाराष्ट्र से जुड़े कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री के साथ बैठक में महाराष्ट्र के मुद्दों के साथ महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष की मांग कितनी प्रमुखता से उठाई जाती है।
