चंडीगढ़/ नई दिल्ली/लखनऊ: पंजाब में किसानों के लंबे विरोध और दबाव के बाद भगवंत मान सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी 2025 को वापस ले लिया है। यह फैसला राज्य सरकार और किसानों के बीच विश्वास और संवाद को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने इसे किसानों की बड़ी जीत बताया, और कहा कि यह संघर्ष सिर्फ जमीन बचाने का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और किसानों के अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है।
यह किए सरकार का ऐलान
सरकार ने प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी विकास विभाग ने आदेश जारी कर पॉलिसी को रद्द किया है। सरकार ने कहा कि किसी भी योजना को किसानों की सहमति के बिना लागू नहीं किया जाएगा। 1 एकड़ जमीन के बदले 1000 गज रिहायशी + 200 गज व्यवसायिक प्लॉट, और 9 एकड़ देने पर 3 एकड़ ग्रुप हाउसिंग के लिए था। 50 एकड़ देने पर 30 एकड़ ग्रुप हाउसिंग और कॉमर्शियल प्लॉट का नियम बनाया गया।
हाईकोर्ट ने किया दखल
पॉलिसी को पंजाब, और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती मिली थी। हाईकोर्ट ने 13 सितंबर तक अंतरिम रोक लगाई थी। पॉलिसी के खिलाफ किसान संगठनों, विपक्ष और यहां तक कि आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी मोर्चा खोला था। 21 जुलाई को सरकार ने संशोधन किया, लेकिन विरोध जारी रहा।
अब 13 अगस्त को राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध दिवस
किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने बताया कि किसान, मजदूर और सामाजिक संगठन 13 अगस्त को “राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध दिवस” मनाएंगे। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की 25% टैरिफ धमकी। भारत-UK CETA समझौता, जिसे किसान संगठन भारत की संप्रभुता, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता पर खतरा मानते हैं।”बहुराष्ट्रीय कंपनियों खेती छोड़ो” मुख्य नारा है। इसके साथ ही किसानों, मजदूरों और देश की संप्रभुता पर मंडराते खतरे हैं। इसमें राजन क्षीरसागर (अ भा कि सभा, राष्ट्रीय अध्यक्ष), इंद्रजीत सिंह (अ भा कि सभा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), पी कृष्णा प्रसाद (अखिल भारतीय किसान सभा, राष्ट्रीय वित्त सचिव),हरजिंदर सिंह (राष्ट्रीय किसान मंच, हरियाणा, प्रदेश उपाध्यक्ष), एड शिव सिंह (किसान संघर्ष समिति, राष्ट्रीय प्रवक्ता), तेजराम विद्रोही (भाकियू, छत्तीसगढ़, महासचिव), डॉ आनन्द प्रकाश तिवारी (समाजवादी चिंतक, उत्तर प्रदेश) शामिल होंगे, लेकिन संचालन डॉ सुनीलम (राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति) करेंगे।
