2018 में 5% से 2025 में 9.8% तक, एनपीए दर एसएमई सेक्टर से भी ज्यादा
संजीव मेहरोत्रा
महामंत्री,बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) का उद्देश्य छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें,और रोजगार के अवसर पैदा कर सकें। लेकिन हाल के आंकड़े इस योजना की बड़ी चुनौती को उजागर कर रहे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पिछले दिनों बताया कि मार्च 2025 तक मुद्रा लोन का कुल बकाया एनपीए 9.8% तक पहुंच गया, जबकि मार्च 2018 में यह दर लगभग 5% थी। यह दर एसएमई (Small and Medium Enterprises) में औसत एनपीए से भी ज्यादा है, जो बैंकों और सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय है।
मुद्रा लोन की विशेषताएं और बढ़ता एनपीए:
बिना गारंटी के लोन
मुद्रा लोन 50,000 से 10 लाख तक बिना किसी कोलेटरल (गारंटी) के दिए जाते हैं। इसमें तीन श्रेणियां हैं। शिशु लोन 50,000 तक, किशोर लोन 50,001 से 5 लाख तक, तरुण लोन 5 लाख से 10 लाख तक है, चूंकि ये लोन unsecured होते हैं। इसलिए किस्तें समय पर न चुकाने पर तेजी से एनपीए में बदल जाते हैं।
सरकार और बैंकों के लिए चुनौती
मुद्रा लोन के एनपीए में बढ़ोतरी बैंकों के बैलेंस शीट पर दबाव डाल रही है। सरकार को न केवल वसूली की रणनीति मजबूत करनी होगी, बल्कि लोन वितरण के समय उधारकर्ताओं की क्रेडिट प्रोफाइल पर भी सख्ती बरतनी होगी। बैंकों को चाहिए कि, वसूली के लिए तकनीकी और कानूनी उपायों को तेज करें, लोन लेने वालों को वित्तीय अनुशासन और व्यवसाय प्रबंधन का प्रशिक्षण दें, डिजिटल ट्रैकिंग और नियमित फॉलो-अप प्रणाली लागू करने की सलाह दी।
