लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। आगामी दिनों में इसे देश को समर्पित किया जाएगा, जिससे प्रदेश के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
करीब पांच सौ चौरानवे किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे देश की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल है। इसे लगभग सैंतीस हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इस परियोजना को चार हिस्सों में बांटकर निर्माण कार्य किया गया, जिससे काम तेजी से आगे बढ़ सका।
पहले हिस्से की लंबाई लगभग एक सौ तीस किलोमीटर है, जबकि दूसरे और तीसरे हिस्से की लंबाई डेढ़ सौ किलोमीटर के आसपास रखी गई। चौथा हिस्सा सबसे लंबा है, जिसकी लंबाई लगभग एक सौ सत्तावन किलोमीटर है। सभी हिस्सों में अलग अलग संस्थाओं ने एक साथ काम किया, जिससे निर्माण कार्य समय पर पूरा हो सका।
यह मार्ग केवल यात्रा को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि इसे आर्थिक गलियारे के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इसके आसपास उद्योग, भंडारण और व्यापार से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच की दूरी कम होगी और यात्रा समय में भी बड़ी कमी आएगी। साथ ही माल ढुलाई की लागत घटेगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना प्रदेश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और निवेश के नए रास्ते खोलेगी। यह एक्सप्रेसवे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की प्रगति का नया प्रतीक बन सकता है।
