महिला और ट्रांसजेंडर प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर जवाबदेही तय करने की मांग, नेहा बोरा रिहा; अभिजीत दिपके की पेशी को लेकर मंदिर मार्ग थाने के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में शनिवार को महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर महिला, ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी प्रदर्शनकारियों के कथित यौन उत्पीड़न तथा शारीरिक दुर्व्यवहार के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। इस बीच, शुक्रवार को हिरासत में ली गईं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है।
महिला संगठनों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई मांगी
महिला संगठनों की सदस्याएं गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास एकत्र हुईं और वहां से पुलिस मुख्यालय की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर और बैनर के साथ कथित यौन एवं लैंगिक हिंसा के खिलाफ नारे लगाए। वे इस मामले में जवाबदेही तय करने और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय तथा कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने पहुंचीं। संगठनों ने अपने बयान में दावा किया कि वीडियो, तस्वीरों और पीड़ितों के बयानों में महिलाओं, ट्रांसजेंडर तथा नॉन-बाइनरी प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले सामने आए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान हिरासत में ले जाने वाली बसों और हिरासत केंद्रों में भी हिंसा की घटनाएं हुईं। संगठनों ने मांग की कि जांच में दोषी पाए जाने वालों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पुलिसकर्मियों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नेहा बोरा रिहा, अभिजीत दिपके की मजिस्ट्रेट के सामने पेशी
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, नेहा बोरा को शुक्रवार को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध मार्च से पहले निवारक हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत हिरासत संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया। दूसरी ओर, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धाराओं 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उन्हें गिरफ्तार किया गया और शनिवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है। इसी कारण मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई। सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने सामाजिक माध्यम पर पोस्ट कर बताया कि दिपके को दोपहर करीब 12 बजे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। वहीं, सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने दिल्ली पुलिस पर दिपके के अपहरण का आरोप लगाया। उनका कहना है कि देर रात तक दिपके के परिजनों, वकीलों और पार्टी की टीम को उनकी स्थिति की जानकारी नहीं दी गई थी। यह आरोप सीजेपी की ओर से लगाया गया है।
निषेधाज्ञा उल्लंघन पर एफआईआर, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को कनॉट प्लेस और नई दिल्ली के अन्य इलाकों में लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में कई प्राथमिकी दर्ज कीं। अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू होने के बावजूद कनॉट प्लेस के आसपास भीड़ जमा हुई थी। पुलिस ने चेतावनी दी है कि नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने हिरासत की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को लंबे समय तक थाने में रखा गया और उन्हें कानूनी सलाह लेने में भी परेशानी हुई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदान के अधिकारों से जुड़े सवालों को लेकर है। वहीं, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर विवाद जारी है। मामले में आगे की स्थिति पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के बयानों से स्पष्ट होगी।
