नई दिल्ली : बहुजन समाज पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर से अपनी चुनावी तैयारियों को तेज करती नजर आ रही है। पार्टी ने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और पुराने जनाधार को वापस जोड़ने के लिए बड़े स्तर पर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में 22 और 23 जून को दो बड़ी जनसभाओं का आयोजन किया जा रहा है, जो क्रमशः अयोध्या और अकबरपुर में होंगी।
इन दोनों जनसभाओं को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि इन रैलियों के जरिए बसपा अपने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने के साथ-साथ जनता के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का फोकस खासतौर पर बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनाव के लिए जमीन तैयार करने पर है।
सूत्रों के मुताबिक, बसपा ने जून महीने से ही चुनावी गतिविधियों को तेज करने की योजना बनाई थी और इन जनसभाओं को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इन कार्यक्रमों में पार्टी के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे, जिससे संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन किया जा सके। इसके साथ ही जिन विधानसभा सीटों पर पार्टी ने अपने प्रभारी नियुक्त किए हैं, उन्हें संभावित प्रत्याशी के रूप में मंच पर स्थान दिए जाने की भी संभावना है। इससे पार्टी अपने संभावित चेहरों को जनता के सामने मजबूत तरीके से पेश करना चाहती है और स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
जानकारी के अनुसार, बसपा इन जनसभाओं के दौरान दूसरे दलों के कुछ नेताओं को भी पार्टी में शामिल कराने की तैयारी कर रही है। इनमें एक पूर्व सांसद का नाम भी चर्चा में है, जो हाल ही में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। यदि यह शामिल होते हैं, तो इसे बसपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा सकता है। प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल की अयोध्या और अकबरपुर दोनों जिलों में मजबूत पकड़ मानी जाती है। बीते कुछ महीनों में उन्होंने इन क्षेत्रों में कई संगठनात्मक कार्यक्रम किए हैं, जिनमें हजारों लोगों को बसपा की सदस्यता दिलाई गई थी। इसी सक्रियता को देखते हुए पार्टी नेतृत्व और बसपा सुप्रीमो मायावती का उन पर भरोसा और मजबूत हुआ है।
अयोध्या में जनसभा आयोजित करने को पार्टी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि यह जिला राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यहां से पार्टी अपने संदेश को पूरे प्रदेश में प्रभावी तरीके से पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर बसपा आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है और इन जनसभाओं को पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआती बड़ी पहल माना जा रहा है। अब देखना होगा कि बसपा की यह रणनीति आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को कितना प्रभावित करती है।
