लखनऊ : यूपी पुलिस की ट्रांसफर पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया गया है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने सिपाही से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के पुलिसकर्मियों के तबादलों को लेकर नया सर्कुलर जारी किया है। इस नई नीति के तहत 2019 के बाद भर्ती हुए पुलिसकर्मियों का सामान्य तौर पर तबादला नहीं किया जाएगा। केवल विशेष परिस्थितियों में ही उनके ट्रांसफर पर विचार होगा और इसका फैसला पुलिस स्थापना बोर्ड यानी पीईबी द्वारा लिया जाएगा। डीजीपी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, कोई भी इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर अपने गृह रेंज, गृह जनपद या गृह जनपद से सटे बॉर्डर जिले में तैनात नहीं किया जाएगा। वहीं मुख्य आरक्षी और आरक्षी की पोस्टिंग भी उनके गृह जनपद या सीमावर्ती जिले में नहीं की जा सकेगी।
हालांकि 2019 से पहले भर्ती हुए पुलिसकर्मियों के तबादले किए जा सकेंगे। डीजीपी ने साफ किया है कि 2019 बैच के बाद केवल उन्हीं पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर होगा, जिनमें पति और पत्नी दोनों पुलिस विभाग में कार्यरत हों। यह फैसला 22 जून 2018 की ट्रांसफर पॉलिसी के अनुरूप लिया गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भी यूपी पुलिस की ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव किया गया था। उस दौरान जिन पुलिस अधिकारियों की एक जिले में तीन साल की तैनाती पूरी हो चुकी थी या 31 मई 2024 तक तीन वर्ष पूरे हो गए थे, उनके तबादले किए गए थे। योगी सरकार ने पति-पत्नी को एक ही जिले में तैनाती देने को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाई है।
सरकार का मानना है कि अलग-अलग जिलों में तैनात दंपती पुलिसकर्मियों को पारिवारिक और व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 22 मई 2025 को पहले चरण में 101 सिपाहियों के तबादले किए गए थे, जिनमें महिला पुलिसकर्मियों को उनके पति के जिले में और पुरुष पुलिसकर्मियों को उनकी पत्नी के तैनाती वाले जिले में भेजा गया था। यह पहली बार था जब इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण पति-पत्नी नीति के आधार पर किया गया। नई ट्रांसफर पॉलिसी को प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्ष व्यवस्था की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
