बैतूल: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में किसान संघर्ष समिति ने लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपा। 22 अक्टूबर 2026 को संयुक्त किसान मोर्चा और पीपुल अगेंस्ट एसआईआर के आह्वान पर समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम के नेतृत्व में तहसीलदार संजय कुमार बरैया को ज्ञापन दिया गया। इसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को तत्काल रद्द करने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और मतदाता सूची से हटाए गए नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल करने सहित कई मांगें रखी गईं। समिति ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।
एसआईआर रद्द करने और चुनावी व्यवस्था में बदलाव की मांग
किसान संघर्ष समिति ने ज्ञापन में मांग की कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया तत्काल रद्द की जाए और मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल किए जाएं। समिति ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की। ज्ञापन में वर्ष 2023 के संबंधित अधिनियम में संशोधन कर चयन पैनल में प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत कैबिनेट मंत्री के स्थान पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग उठाई गई। इसके अलावा आनुपातिक प्रतिनिधित्व लागू करने, चुनाव में धनबल और बाहुबल पर अंकुश लगाने तथा चुनावों के लिए राज्य वित्तपोषण की व्यवस्था को वैध बनाने की मांग भी रखी गई। समिति ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर संवैधानिक शपथ के उल्लंघन के आरोप लगाए और केंद्र सरकार पर चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं करने का आरोप लगाया। ये आरोप समिति की ओर से ज्ञापन में लगाए गए हैं।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग
ज्ञापन में किसान संघर्ष समिति ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल संबंधी व्यवस्था को बहाल करने की मांग की। समिति ने प्रदर्शनकारियों, विशेषकर छात्रों और युवाओं के खिलाफ कथित पुलिस दमन तथा उत्पीड़न की घटनाओं पर विरोध जताया। उसने महिला छात्रों और पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न के मामलों की तत्काल जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की। समिति ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और प्रदर्शनकारियों पर हमला संविधान तथा कानून के शासन के विरुद्ध है। ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय सहित न्यायपालिका से भी इन मामलों में स्वतः संज्ञान लेने की अपेक्षा जताई गई।
अवैध नजरबंदी का आरोप, देशव्यापी प्रदर्शन का समर्थन
किसान संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनके घरों में नजरबंद करके शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। समिति ने इसे नागरिकों की निजता और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए ऐसी कार्रवाई रोकने की मांग की। उसने दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से संबंधित व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग भी दोहराई। ज्ञापन में समिति ने 23 अक्टूबर 2026 को देशभर में जिला और तहसील मुख्यालयों, राज्य की राजधानियों तथा नई दिल्ली में लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए आयोजित प्रदर्शनों का समर्थन किया। समिति ने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित दमन जारी रहा, तो किसान उनकी सुरक्षा के लिए आगे आने को मजबूर होंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान किसान संघर्ष समिति की प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता आराधना भार्गव, जिला अध्यक्ष जगदीश दोड़के, तहसील अध्यक्ष कृपाल सिंह सिसोदिया, भागवत परिहार, पिरथी बारपेटे, कृष्णा ठाकरे, कैलाश डोंगरदिए, गजानन हजारे, हेमराज देशमुख, चैनसिंह सिसोदिया, तीरथ सिंह बलिहार, अनिल धोटे सहित समिति के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
