बरेली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों को लेकर जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने प्रतिक्रिया दी है। बरेली प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने RSS से हिंदुत्व और राष्ट्रीयता की परिभाषा स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से संघ की विचारधारा में बदलाव दिखाई दे रहा है और इससे कुछ स्वयंसेवकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कहा कि संघ प्रमुख ने किस संदर्भ में बयान दिया है, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, स्वामी यतींद्रानंद गिरि का RSS से पुराना जुड़ाव रहा है। मार्च 2026 में वृंदावन स्थित उनके जीवन दीप आश्रम का उद्घाटन भी RSS प्रमुख मोहन भागवत ने किया था।
भारत की पहचान सनातन संस्कृति से
महामंडलेश्वर ने कहा कि भारत की पहचान सनातन संस्कृति से है, और सनातन के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने हिंदुत्व और राष्ट्रीयता को लेकर संघ की स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बताई। उन्होंने सनातन संस्कृति को भारत की मूल पहचान बताते हुए कहा कि देश में सनातन परंपरा का विरोध करने वालों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। उनके इस बयान को मौजूदा वैचारिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका ‘बुद्धि का शुद्धीकरण’ होना चाहिए।उन्होंने राहुल गांधी को भाजपा के लिए ‘वरदान’ तक बताया।हालांकि, ये टिप्पणियां स्वामी यतींद्रानंद गिरि के राजनीतिक विचार और आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
योगी आदित्यनाथ को बताया ‘भारत की पसंद’
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की तारीफ करते हुए महामंडलेश्वर ने कहा कि योगी मॉडल की चर्चा और प्रशंसा देश-दुनिया के कई हिस्सों में हो रही है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को ‘भारत की पसंद’ बताया। वहीं, भाजपा को लेकर उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पार्टी को अपने पुराने और समर्पित कैडर की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बाहर से आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता को पार्टी के लिए नुकसानदायक बताया।
मुसलमानों के पूर्वजों को लेकर टिप्पणी
स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने भारत के मुसलमानों के पूर्वजों और मध्यकालीन इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि मध्यकालीन दौर में आक्रमण और धार्मिक दबाव के कारण कई लोगों ने अपना धर्म बदला। उन्होंने अपने बयान में गौरी, खिलजी और औरंगजेब के दौर का उल्लेख किया। यह उनका ऐतिहासिक आकलन है; ऐसे दावों को व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ और स्रोतों के साथ अलग-अलग तरह से देखा जाता है।
