केसर चीनी मिल की कुर्क संपत्तियों का नए सर्किल रेट से होगा मूल्यांकन, मशीनरी की तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार, ओसवाल मिल की जमीन की नीलामी प्रक्रिया भी इसी महीने आगे बढ़ाने की तैयारी
बरेली : किसानों के बकाया गन्ना मूल्य की वसूली को लेकर जिला प्रशासन ने चीनी मिलों की कुर्क संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया तेज कर दी है। बहेड़ी स्थित केसर चीनी मिल के बाद अब नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल की कुर्क जमीन को भी नीलाम करने की तैयारी है। प्रशासन का फोकस दोनों मिलों से किसानों के बकाये की अधिक से अधिक वसूली करने पर है। बहेड़ी की केसर चीनी मिल पर किसानों का करीब 146.50 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया बताया गया है। बकाये की वसूली के लिए प्रशासन ने मिल की संपत्तियां कुर्क की थीं। इन संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया पहले भी शुरू की गई थी, लेकिन किसान संगठनों और राजनीतिक दलों के विरोध समेत अन्य कारणों के चलते इसे स्थगित करना पड़ा था।
नए सर्किल रेट से फिर होगा संपत्तियों का मूल्यांकन
अब प्रशासन कुर्क संपत्तियों का नए सर्किल रेट के आधार पर दोबारा मूल्यांकन करा रहा है।इसके लिए सात सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर संपत्तियों का नया मूल्य निर्धारित किया जाएगा।मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन नीलामी की कार्रवाई को नए सिरे से आगे बढ़ाएगा। इससे पहले प्रस्तावित नीलामी को लेकर हुए विरोध के बाद प्रशासन अब संपत्तियों की कीमत और प्रक्रिया को लेकर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है।
मशीनरी की कीमत तय करने में तकनीकी टीम की मदद
केसर चीनी मिल की मशीनरी और अन्य उपकरणों का मूल्यांकन भी नीलामी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मशीनरी और उपकरणों की वास्तविक कीमत का आकलन करने के लिए वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट, पुणे की तकनीकी टीम से जांच कराई गई है। तकनीकी टीम मिल की मशीनरी और उपकरणों का निरीक्षण कर चुकी है। अब प्रशासन को उसकी रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलने के बाद मशीनरी और अन्य संपत्तियों की कीमत निर्धारित करने में मदद मिलेगी और नीलामी की अगली प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
नवाबगंज की ओसवाल मिल पर भी प्रशासन का फोकस
बहेड़ी के साथ-साथ अब प्रशासन का ध्यान नवाबगंज स्थित ओसवाल चीनी मिल की कुर्क जमीन पर भी है। किसानों के करीब 70 करोड़ रुपये के बकाया गन्ना मूल्य की वसूली के लिए मिल की जमीन कुर्क की गई थी।इस कुर्क जमीन को बेचने की प्रक्रिया पहले भी शुरू की गई थी, लेकिन नीलामी में जमीन नहीं बिक सकी। अब अधिकारियों को इसी महीने नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में नवाबगंज की कुर्क जमीन की दोबारा नीलामी की तैयारी की जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि संपत्ति की बिक्री के जरिए मिलने वाली रकम से किसानों के बकाया गन्ना मूल्य की वसूली की जा सके।
दो चीनी मिलों से करोड़ों की वसूली चुनौती
बरेली जिले में चीनी मिलों पर किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का मामला लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। बहेड़ी की केसर चीनी मिल पर करीब 146.50 करोड़ रुपये और नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल से जुड़े मामले में करीब 70 करोड़ रुपये के बकाये की वसूली का लक्ष्य है। प्रशासन अब कुर्क संपत्तियों को नीलाम कर बकाये की रकम जुटाने की कोशिश में है। बहेड़ी में नए सर्किल रेट से मूल्यांकन और मशीनरी की तकनीकी रिपोर्ट के बाद नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जबकि नवाबगंज में कुर्क जमीन की बिक्री की कार्रवाई को इसी महीने गति देने की तैयारी है।
किसानों को भुगतान दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता
दोनों मामलों में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कुर्क संपत्तियों को उचित प्रक्रिया के तहत बेचकर बकाये की रकम की वसूली करना है। नीलामी से मिलने वाली धनराशि से किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, बहेड़ी में मूल्यांकन और तकनीकी रिपोर्ट, जबकि नवाबगंज में कुर्क जमीन की नीलामी प्रशासन की अगली प्राथमिकताओं में शामिल है। आने वाले दिनों में दोनों मामलों में नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ किसानों के बकाये की वसूली को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
