बरेली में नकटिया नदी पुनर्जीवन अभियान को मिला बड़ा जनसमर्थन, हजारों लोग जुटे, वर्मी कम्पोस्टिंग यूनिट का भी शुभारंभ
बरेली : शहर की नकटिया नदी को पुनर्जीवित करने के अभियान ने रविवार को बड़े जनअभियान का रूप ले लिया। बरेली कैंट में आयोजित नदी सफाई और पर्यावरण संरक्षण अभियान में कई हजार नागरिकों, विद्यार्थियों, युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक संस्थाओं ने हिस्सा लिया।अभियान के दौरान करीब 500 मीटर नदी के किनारे की सफाई कर लगभग 30 टन कचरा हटाया गया। इसके साथ ही करीब 10 लाख वेटिवर लीव्स और विभिन्न प्रजातियों के 1,500 पौधे रोपे गए।
नकटिया को ‘नाथ गंगा’ नाम देने की तैयारी

अभियान का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण, वन, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया और पौधरोपण अभियान में सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान मौजूद जनसमूह के सामने मंत्री ने नकटिया नदी के पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इसके साथ ही नकटिया नदी को ‘नाथ गंगा’ के नाम से पहचान दिलाने के प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया।
500 मीटर नदी किनारे से निकला 30 टन कचरा
नकटिया नदी के पुनर्जीवन अभियान के तहत धोपेश्वर मंदिर के पीछे नदी के तट पर व्यापक सफाई अभियान चलाया गया।नागरिकों और स्वयंसेवकों ने नदी और उसके आसपास से प्लास्टिक, ठोस कचरे और अन्य प्रदूषकों को हटाया। अभियान में करीब 500 मीटर नदी किनारे की सफाई की गई और लगभग 30 टन कचरा हटाया गया। इसके साथ नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर वेटिवर लीव्स और पौधों का रोपण किया गया।
सिर्फ सफाई नहीं, नदी के पूरे इकोसिस्टम को संवारने का लक्ष्य
छावनी परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. तनु जैन के नेतृत्व में चलाया जा रहा यह अभियान सिर्फ एक दिन की नदी सफाई तक सीमित नहीं है। मिशन का उद्देश्य नकटिया नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का दीर्घकालिक पुनर्जीवन करना है।इसके तहत नियमित सफाई, देशज प्रजातियों का पौधरोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, वैज्ञानिक सर्वेक्षण और नियोजन, पारिस्थितिकीय हस्तक्षेप तथा जनभागीदारी को प्रमुख आधार बनाया गया है। डॉ. तनु जैन ने कहा कि नकटिया नदी को पुनर्जीवित करने का उद्देश्य केवल कचरा हटाना नहीं, बल्कि नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को दोबारा मजबूत करना है। उन्होंने नागरिकों, एनजीओ, स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संस्थाओं, विद्यार्थियों और युवाओं से इस अभियान से लगातार जुड़ने की अपील की।
पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों में बड़ी भागीदारी

अभियान में सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अभियान में सहयोग किया। आयोजकों के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने नकटिया नदी पुनर्जीवन अभियान को नई गति दी है। संदेश साफ है कि नदी और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बरेली कैंट में वर्मी कम्पोस्टिंग यूनिट का आगाज

नदी पुनर्जीवन अभियान के साथ ही बरेली कैंट में इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर में वर्मी कम्पोस्टिंग यूनिट का भी शुभारंभ किया गया। इसका उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने किया। इस यूनिट के जरिए जैविक और गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से उपचार कर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाएगी। इससे कचरे की मात्रा कम करने, लैंडफिल पर दबाव घटाने और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
IVRI के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की प्रक्रिया
वर्मी कम्पोस्टिंग को वैज्ञानिक और प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), इज्जतनगर, बरेली के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके जरिए तकनीकी विशेषज्ञता, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और बेहतर प्रबंधन पद्धतियों को छावनी के अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र में शामिल किया जाएगा। छावनी परिषद पहले से ही कचरा पृथक्करण, कम्पोस्टिंग, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में विभिन्न पहल कर रही है। वर्मी कम्पोस्टिंग यूनिट को इसी अभियान की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
नकटिया को स्वच्छ और जीवंत नदी बनाने का लक्ष्य
नकटिया नदी पुनर्जीवन मिशन का दीर्घकालिक लक्ष्य नदी को स्वच्छ, निर्मल, हरी-भरी, स्वस्थ और जीवंत नदी के रूप में विकसित करना है। इसके साथ बरेली कैंट में पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का स्थायी मॉडल विकसित करने की योजना है। डॉ. तनु जैन ने अभियान से जुड़े लोगों का आभार जताते हुए कहा कि नकटिया नदी का पुनर्जीवन तभी संभव है, जब समाज लगातार इसमें अपनी भागीदारी निभाए।
