रुहेलखंड विश्वविद्यालय की जमीन के सीमांकन का विवाद निपटवाने का दिया था भरोसा, पांच लोगों से 25 लाख रुपये में तय हुआ था सौदा,लखनऊ के अपार्टमेंट
बरेली : रुहेलखंड विश्वविद्यालय से जुड़े जमीन के सीमांकन विवाद को सुलझवाने का झांसा देकर पांच लोगों से 15.50 लाख रुपये हड़पने का मामला सामने आया है। आरोप है कि लखनऊ निवासी कौन्तेय सिंह ने खुद को विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति का करीबी और शासन -प्रशासन के बड़े अधिकारियों तथा राजनीतिक नेताओं का खास बताकर लोगों को अपने प्रभाव में लिया। मुख्यमंत्री के साथ तस्वीरें, नेताओं से नजदीकी के दावे और एडिट किए हुए वीडियो दिखाकर उसने पीड़ितों का भरोसा जीता। इसके बाद जमीन का विवाद निपटवाने के नाम पर 25 लाख रुपये में सौदा तय किया गया। आरोप है कि आरोपी ने शुरुआत में पांच लोगों से 15.50 लाख रुपये ले लिए, लेकिन करीब तीन साल बीतने के बाद भी जमीन का विवाद नहीं सुलझा। रुपये वापस मांगने पर कथित तौर पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़ितों ने एसएसपी अनुराग आर्य से शिकायत की। एसएसपी के आदेश पर बारादरी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कुलपति का करीबी बताकर जमाया प्रभाव
शहर के सिविल लाइंस निवासी सुमित भारद्वाज समेत पांच लोगों की नबादा जोगियान क्षेत्र में गाटा संख्या 374 और 105 की जमीन है। इस जमीन के सीमांकन को लेकर रुहेलखंड विश्वविद्यालय से विवाद चल रहा था। इसी दौरान लखनऊ निवासी कौन्तेय सिंह ने सुमित भारद्वाज से संपर्क किया। आरोप है कि उसने खुद को विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति केपी सिंह का करीबी बताया और दावा किया कि लखनऊ में शासन-प्रशासन के बड़े अधिकारियों और राजनीतिक लोगों तक उसकी सीधी पहुंच है।
मुख्यमंत्री के साथ फोटो और एडिटेड वीडियो दिखाकर जीता भरोसा
शिकायत के मुताबिक, आरोपी अपनी फेसबुक आईडी और व्हाट्सएप डीपी पर मुख्यमंत्री के साथ तस्वीर लगाता था। वह नेताओं के साथ अपने संबंधों का हवाला देता और बरेली आने पर सर्किट हाउस सहित सरकारी गेस्ट हाउसों में ठहरने की बात कहकर अपना रसूख दिखाता था। इतना ही नहीं, पीड़ितों का आरोप है कि उसने अपना प्रभाव साबित करने के लिए एडिट किए हुए वीडियो भी दिखाए। इन सब बातों से प्रभावित होकर पांचों लोगों ने जमीन का सीमांकन विवाद निपटवाने के लिए उससे बातचीत की और 25 लाख रुपये में सौदा तय कर लिया।
लखनऊ के अपार्टमेंट से लेकर बरेली के सर्किट हाउस तक पहुंचाई रकम
पीड़ितों के अनुसार, 19 जून 2022 से 10 दिसंबर 2022 के बीच अलग-अलग तारीखों में आरोपी को कुल 15.50 लाख रुपये दिए गए। इसमें एक अगस्त 2022 को लखनऊ के गोमती नगर स्थित आरोपी के अपार्टमेंट में दिए गए 10 लाख रुपये भी शामिल हैं। इसके अलावा बरेली के सर्किट हाउस और रेलवे जंक्शन के पास स्थित कार्यालय में भी रकम दी गई। आरोप हैं कि उनके पास रुपये के लेनदेन से संबंधित व्हाट्सएप संदेश और बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद हैं।इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर उन्होंने पुलिस से मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
तीन साल तक नहीं सुलझा विवाद, वापस किए सिर्फ एक लाख
आरोप है कि रकम लेने के बाद भी आरोपी ने जमीन का सीमांकन विवाद नहीं सुलझवाया। पीड़ित लगातार उससे संपर्क करते रहे और अपने रुपये वापस मांगते रहे, लेकिन वह टालमटोल करता रहा।शिकायत के मुताबिक, 25 अगस्त 2024 को रचिता अग्रवाल के खाते से राम बहादुर के खाते में एक लाख रुपये वापस भेजे गए। इसके बाद भी शेष 14.50 लाख रुपये वापस नहीं किए गए।
रुपये मांगने पर गाली-गलौज का आरोप
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि 25 फरवरी 2026 को सुमित भारद्वाज ने फोन करके पूरी रकम वापस मांगी। इस पर आरोपी ने रुपये लौटाने से इनकार कर दिया। आरोप है कि उसने फोन पर गाली-गलौज की और शिकायत करने पर जान से मरवाने की धमकी दी। साथ ही राजनीतिक संपर्कों और शासन -प्रशासन में अपनी पकड़ होने का हवाला देकर पीड़ितों को डराने की कोशिश की। उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
पांच लोगों ने SSP अनुराग आर्य से की शिकायत
इस मामले में सुमित भारद्वाज, रामबाबू सिंह एडवोकेट, राम बहादुर, आशिक अली और गौरव कन्नौजिया ने एसएसपी अनुराग आर्य से शिकायत की। शिकायत में पूरे घटनाक्रम का विवरण देते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई और रकम वापस दिलाने की मांग की गई।
SSP के आदेश पर बारादरी थाने में FIR, पुलिस जांच में जुटी
एसएसपी अनुराग आर्य के आदेश पर बारादरी पुलिस ने लखनऊ निवासी कौन्तेय सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, रुपये के लेनदेन, व्हाट्सएप संदेशों और बातचीत की रिकॉर्डिंग की जांच करेगी। फिलहाल मामला दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।
