रेजीडेंसी गार्डन समेत कई पॉश इलाकों में जलभराव, लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर, जगतपुर से मलूकपुर और पंजाबपुरा तक पानी ही पानी, 27 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी
बरेली : यूपी की राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में बारिश से जनजीवन प्रभावित है। बरेली में शुक्रवार से शुरू हुआ मूसलाधार बारिश का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। लगातार हो रही बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी है।निचले इलाकों के साथ अब पॉश कॉलोनियां भी जलभराव की चपेट में हैं। स्टेडियम रोड स्थित रेजीडेंसी गार्डन में करीब तीन फीट पानी भरने की बात सामने आई है। इसके बाद यहां रहने वाले कुछ लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। बारिश की वजह से शहर का न्यूनतम तापमान करीब 18 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया,जबकि पिछले 24 घंटे में 126 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश से सड़कें जलमग्न हैं, और कई इलाकों में लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पॉश कॉलोनियों में भी जलभराव

भारी बारिश का असर सिर्फ शहर के निचले और पुराने इलाकों तक सीमित नहीं रहा। स्टेडियम रोड की रेजीडेंसी गार्डन, एयरफोर्स रोड की आकांक्षा इंक्लेव, दुर्गा नगर एम, सुरेश शर्मा नगर, हजियापुर और संजय नगर संपवेल वाली गली समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति सामने आई। रेजीडेंसी गार्डन में तीन फीट से अधिक पानी भरने से लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। इससे साफ है कि इस बार लगातार बारिश ने शहर के उन इलाकों को भी प्रभावित किया है, जिन्हें आमतौर पर अपेक्षाकृत बेहतर जलनिकासी वाला क्षेत्र माना जाता है।
जगतपुर से पंजाबपुरा तक पानी ही पानी
शहर के कई अन्य हिस्सों में भी जलभराव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। जगतपुर, एजाजनगर गौटिया, मढ़ीनाथ, एकतानगर, राजेंद्रनगर, शांतिनगर और बदायूं रोड के कई इलाकों में बारिश का पानी सड़कों पर जमा है।मलूकपुर, जसौली, दरगाह आला हजरत मोड़,बमनपुरी,सौदागरान और पंजाबपुरा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में भी जलभराव की तस्वीरें सामने आई हैं। कई जगह सड़कें पूरी तरह पानी में डूबी दिखाई दे रही हैं। कुछ इलाकों में घुटनों तक पानी भरने से लोगों के लिए घरों से निकलना और बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। जलभराव के बीच सड़क पर मौजूद गड्ढे और नाले दिखाई नहीं देने से वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा हो सकता है।
पंजाबपुरा में हर बारिश में जलभराव की शिकायत
पंजाबपुरा नीम चढ़ाई मोहल्ले में भी मूसलाधार बारिश के बाद सड़कें जलमग्न हो गईं। स्थानीय निवासी नदीम प्रिंस के मुताबिक जलभराव के कारण घर से निकलना और दुकान तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में यहां बार-बार जलभराव की समस्या सामने आती है और कई बार गंदा पानी घरों तक पहुंच जाता है। पम्मी खां वारसी ने नगर निगम से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि हर साल बारिश के दौरान पानी निकालने की व्यवस्था करने के बजाय जलभराव की समस्या के मूल कारणों का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
7 सितंबर की बारिश के बाद फिर वही सवाल

बरेली में सितंबर महीने में भारी बारिश से जलभराव की समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। 7 सितंबर की भारी बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर जलभराव हुआ था। इसके बाद प्रशासन की ओर से जलनिकासी व्यवस्था की समीक्षा की गई थी। डीएम अविनाश सिंह के निरीक्षण के दौरान नदी की जमीन, प्राकृतिक जलनिकासी क्षेत्रों और निर्माण से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिया गया था। इसके बाद नदी की जमीन के सीमांकन और अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इससे यह बात सामने आई थी कि बरेली की जलभराव की समस्या केवल नालों की सफाई तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक जलमार्ग, तालाब,नदी क्षेत्र, अतिक्रमण और शहर के मौजूदा ड्रेनेज नेटवर्क—इन सभी का असर भारी बारिश के दौरान दिखाई देता है।
19 दिन बाद फिर ड्रेनेज की परीक्षा
7 सितंबर की बारिश के बाद प्रशासन और नगर निगम के सामने जलनिकासी की बड़ी चुनौती आई थी। अब 26 सितंबर को महज 19 दिन बाद लगातार बारिश ने एक बार फिर शहर की जलनिकासी व्यवस्था की परीक्षा ले ली है। इस दौरान ड्रेनेज मास्टर प्लान, पुराने नालों और प्राकृतिक जलनिकासी के रास्तों को लेकर योजनाओं और कार्रवाई की बात सामने आई थी। लेकिन मौजूदा बारिश में दोबारा बड़े पैमाने पर जलभराव सामने आने के बाद यह सवाल जरूर उठ रहा है कि पिछली बारिश के बाद की गई तैयारियां जमीन पर कितनी प्रभावी साबित हुईं।
बारिश से पहले नगर निगम ने भी की थी तैयारी

इस बार मौसम विभाग की चेतावनी पहले ही जारी हो गई थी। भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की चार दिन की छुट्टियां रद्द कर दी थीं। जलनिकासी से जुड़े विभागों के अधिकारियों को फील्ड में रहने के निर्देश दिए गए थे। नगर आयुक्त ने मढ़ीनाथ, सिटी रेलवे स्टेशन और बाकरगंज क्षेत्र में जलनिकासी व्यवस्था का निरीक्षण भी किया था। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए गए थे। यानी बारिश से पहले प्रशासन और नगर निगम की ओर से तैयारियां की गई थीं। अब लगातार बारिश के बीच सामने आया जलभराव उन तैयारियों की जमीनी परीक्षा बन गया है।
126 मिमी बारिश से बदला मौसम
लगातार बारिश के कारण बरेली के तापमान में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और बीते 24 घंटे में 126 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। बारिश और ठंडक के कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई। सड़क पर निकलने वाले लोग छाता और रेनकोट का सहारा लेते नजर आए।
27 सितंबर तक बारिश का खतरा
बारिश को लेकर मौसम विभाग की चेतावनी भी अभी खत्म नहीं हुई है।।भारत मौसम विज्ञान विभाग के 26 सितंबर के अपडेट के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी है। 27 सितंबर को भी बहुत भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है। इससे साफ है कि बरेली में अगले कुछ घंटे भी महत्वपूर्ण हैं। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो पहले से जलभराव वाले इलाकों में परेशानी और बढ़ सकती है।
स्कूल-कॉलेज बंद, प्रशासन अलर्ट
भारी बारिश की चेतावनी के बीच बरेली में 26 सितंबर को स्कूलों के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। राजस्व, पुलिस, नगर निकाय, स्वास्थ्य, बिजली, सिंचाई और अन्य आपात सेवाओं को भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के कई जिलों के लिए भी भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
ग्रामीण इलाकों में किसानों की बढ़ी चिंता
लगातार बारिश का असर ग्रामीण क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। बारिश और तेज हवाओं के बीच धान की फसल गिरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में लगातार बारिश सिर्फ शहर के जलभराव तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और फसलों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
