नकटिया से नाथ गंगा तक की परिकल्पना को मिलेगी रफ्तार, श्रमदान के जरिए दिया स्वच्छता और जल संरक्षण का संदेश
बरेली : बरेली कैंटोनमेंट बोर्ड की CEO डॉ. तनु जैन के मार्गदर्शन में गुरुवार सुबह कैंट क्षेत्र में पर्यावरण एवं जल संरक्षण को लेकर सामूहिक श्रमदान और जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। सुबह करीब 9 बजे धोपेश्वर नाथ मंदिर के निकट साई स्टेडियम रोड पर आयोजित अभियान में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, नदी स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को यह संदेश देना रहा कि पर्यावरण और जल स्रोतों की सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। अभियान के दौरान लोगों ने स्वेच्छा से श्रमदान कर स्वच्छ और हरित बरेली के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
छोटे-छोटे प्रयासों से आएगा बड़ा बदलाव
इस मौके पर डॉ. तनु जैन ने नागरिक भागीदारी को पर्यावरण संरक्षण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि बदलाव केवल बड़े संसाधनों से नहीं आता, बल्कि छोटे-छोटे सामूहिक प्रयास और नागरिकों की भागीदारी मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास के जलस्रोतों को स्वच्छ रखें, प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करें और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में नियमित रूप से भाग लें।
नकटिया से नाथ गंगा तक की परिकल्पना
अभियान में “नकटिया से नाथ गंगा तक” की परिकल्पना को भी प्रमुखता से सामने रखा गया। इसका उद्देश्य बरेली की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए नदी, जल, हरियाली और जनभागीदारी को एक साथ आगे बढ़ाना है। इस पहल के जरिए एक ऐसे बरेली की परिकल्पना की गई है, जहां प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि शहर के नागरिक भी उसकी जिम्मेदारी उठाएं।

जल, नदी और हरियाली को लेकर जागरूकता
अभियान के दौरान जल संरक्षण और नदी स्वच्छता को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। नागरिकों से जल की बर्बादी रोकने, जलस्रोतों में कचरा न डालने और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की अपील की गई।आयोजकों का संदेश रहा कि शहर का विकास केवल सड़कों और इमारतों से नहीं, बल्कि स्वच्छ जलस्रोतों, हरियाली और सुरक्षित पर्यावरण से भी तय होता है।
बरेली कैंट की पर्यावरणीय पहल को मिल रहा जोर
बरेली कैंटोनमेंट पहले से ही पर्यावरणीय पहलों के कारण चर्चा में रहा है। जून 2026 में TERI के वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर बरेली कैंटोनमेंट को भारत का पहला कार्बन-नेगेटिव कैंटोनमेंट घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।अध्ययन के मुताबिक कैंट क्षेत्र की हरित पट्टी सालाना लगभग 61,128 टन CO₂ समकक्ष का अवशोषण करती है और कुल कार्बन भंडारण लगभग 1.89 लाख टन CO₂ समकक्ष बताया गया था। इसी पर्यावरणीय सोच को आगे बढ़ाते हुए अब जनभागीदारी और श्रमदान के जरिए जल एवं नदी संरक्षण को भी अभियान से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
नागरिकों से लिया गया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
अभियान के अंत में नागरिकों से जल बचाने, नदियों को स्वच्छ रखने, प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाने और प्रकृति के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। साफ संदेश दिया गया कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकारी विभागों का काम नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। जनभागीदारी के जरिए ही बरेली को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील शहर बनाया जा सकता है।
