पांच लाख रुपये खाते में आते ही निकाले चार लाख नकद, 90 हजार रुपये गेमिंग आईडी में किए ट्रांसफर
बरेली: साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों के जरिए निकालकर आगे पहुंचाने वाले कथित गिरोह का बरेली साइबर क्राइम थाना पुलिस ने खुलासा किया है।पुलिस ने रामपुर निवासी दो आरोपियों अरुण मौर्य और अमित कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने और उनमें आने वाली ठगी की रकम निकालकर संबंधित लोगों तक पहुंचाने में मदद करते थे। इसके बदले उन्हें हर बार पांच हजार रुपये देने का लालच दिया गया था। प्रारंभिक जांच में दो बैंक खातों से संबंधित कुल 6.50 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। कार्रवाई के दौरान तीन मोबाइल फोन,चेकबुक,चेक डेबिट कार्ड, बैंक पासबुक,आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। वहीं, मौके पर मौजूद एक अन्य संदिग्ध पुलिस को देखकर फरार हो गया।
मालगोदाम रोड पर पुलिस की कार्रवाई, रामपुर के दो युवक गिरफ्तार
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर 24 और 25 अक्टूबर की दरम्यानी रात सुभाषनगर थाना क्षेत्र के मालगोदाम रोड पर कार्रवाई की। पुलिस ने अरुण मौर्य (24), पुत्र राजकुमार मौर्य, निवासी ग्राम नीस्वी,थाना मिलक, रामपुर और अमित कुमार (25), निवासी ग्राम फतेहपुर, थाना शहजादनगर,रामपुर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल पर एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था। वह आरोपियों से बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज लेने आया था। पुलिस को देखकर वह अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस उसकी पहचान और तलाश में जुटी है।
पांच लाख रुपये खाते में आए, चार लाख नकद निकाले
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि अरुण मौर्य दसवीं तक पढ़ा है, जबकि अमित कुमार स्नातक है। पुलिस के मुताबिक, दोनों की मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई थी। जिसने उन्हें बैंक खाते खुलवाने और उनमें साइबर ठगी की रकम आने पर नकदी निकालकर देने का काम सौंपा था। इसके बदले प्रत्येक बार पांच हजार रुपये देने का लालच दिया गया था। जांच में पता चला कि करीब दो-तीन दिन पहले अरुण मौर्य के एक्सिस बैंक खाते में पांच लाख रुपये आए थे। आरोप है कि इस रकम में से चार लाख रुपये बरेली के सिविल लाइंस स्थित एक्सिस बैंक शाखा से नकद निकाले गए। इसके अलावा, संबंधित व्यक्ति के कहने पर 90 हजार रुपये एक गेमिंग आईडी में ट्रांसफर किए गए।पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी की रकम से एप्पल कंपनी का एक मोबाइल फोन भी खरीदा गया था। यह मोबाइल अमित कुमार के कब्जे से बरामद हुआ है। पुलिस अब नकदी निकासी, गेमिंग आईडी में हुए ट्रांसफर और मोबाइल खरीद से जुड़े लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है।
राजस्थान में दर्ज मिलीं 6.50 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें
पुलिस ने बरामद बैंक खातों और दस्तावेजों का नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर सत्यापन किया। पुलिस के अनुसार, अरुण मौर्य के एक्सिस बैंक खाते से संबंधित पांच लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी की शिकायत राजस्थान के नाहरगढ़ थाने में दर्ज मिली। वहीं, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के एक अन्य खाते का संबंध पीलीभीत के पूरनपुर क्षेत्र के गजरौला निवासी दीपक के नाम से सामने आया। इस खाते से संबंधित डेढ़ लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी की शिकायत राजस्थान के घूमरवाली थाने में दर्ज पाई गई। इस तरह दोनों बैंक खातों से जुड़ी शिकायतों में कुल 6.50 लाख रुपये की रकम सामने आई है। पुलिस ने संबंधित थानों को सूचना भेज दी है। अन्य बैंक खातों और बरामद दस्तावेजों का सत्यापन भी कराया जा रहा है।
चेकबुक, डेबिट कार्ड और
अलग-अलग नामों के दस्तावेज बरामद
पुलिस के अनुसार, बरामदगी में चेकबुक, 4.50 लाख रुपये की राशि अंकित एक चेक और डेबिट कार्ड शामिल हैं। अमित कुमार के कब्जे से सैमसंग और एप्पल कंपनी के मोबाइल फोन,भारतीय स्टेट बैंक की पासबुक, दो आधार कार्ड और राकेश गुप्ता के नाम का पैन कार्ड भी मिला है। पुलिस इन दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैंक खाते किन लोगों के नाम पर खुलवाए गए थे और उनका इस्तेमाल कथित साइबर धोखाधड़ी में किस तरह किया गया। हालांकि, बरामद दस्तावेजों में दर्ज सभी व्यक्तियों की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है।
क्या होते हैं म्यूल बैंक खाते?
साइबर अपराध की भाषा में ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को प्राप्त करने, दूसरे खातों में भेजने या नकदी निकालने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारकों को कमीशन या अन्य लालच देकर उनके खातों का इस्तेमाल किया जाता है। इस मामले में पुलिस का आरोप है कि गिरफ्तार युवक बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने और उसे आगे पहुंचाने में मदद करते थे। जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि खाते किसने खुलवाए, रकम किसने भेजी और नकदी या ऑनलाइन ट्रांसफर के बाद पैसा किन लोगों तक पहुंचा।
साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज, गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश
एसपी क्राइम मनीष सोनकर के मुताबिक, आरोपी साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे और ठगी की रकम निकालकर आगे पहुंचाने में मदद करते थे। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के साथ इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और लेनदेन के नेटवर्क की जांच कर रही है।
साइबर। थाने में मुकदमा दर्ज
इस मामले में साइबर क्राइम थाना बरेली में रिपोर्ट दर्ज की गई है गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई की जा रही है। फरार संदिग्ध की तलाश भी जारी है। इस कार्रवाई में साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक धनंजय कुमार पाण्डेय, उपनिरीक्षक गुरमीत तोमर, उपनिरीक्षक सौरभ तोमर, मुख्य आरक्षी विलिश कुमार, मुख्य आरक्षी हरेन्द्र कुमार और आरक्षी दीपक कुमार शामिल रहे।
