बरेली कोर्ट का फैसला,हत्या के मामले में सतेन्द्र, महावीर और बलवीर को आजीवन कारावास, बलवीर को आर्म्स एक्ट में भी सजा, डीजीसी क्राइम रीतराम राजपूत ने निभाई अहम भूमिका
बरेली : यूपी के बरेली जिले की अदालत ने वर्ष 2016 में थाना आंवला क्षेत्र में हुई हत्या के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों सतेन्द्र, महावीर और बलवीर को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहपठित धारा 34 के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, दूसरे मुकदमे में आरोपी बलवीर को आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत दो वर्ष के कारावास और 2,500 रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है। अदालत के 29 अक्टूबर 2026 के दंडादेश के अनुसार, जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही, मृतक की पत्नी को एक लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने का आदेश पारित किया गया है। इस केस में डीजीसी क्राइम रीतराम राजपूत ने आरोपियों को सजा कराने में अहम भूमिका निभाई है।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, 28 मार्च 2016 को थाना आंवला क्षेत्र के ग्राम महमूदपुर के पूर्व प्रधान प्रेमशंकर शर्मा ने उत्तर अरिल नदी की ओर जाने वाले चकरोड के पास रामस्वरूप के खेत के सामने एक अज्ञात व्यक्ति का शव पड़ा देखा था। शव की बाईं ओर माथे के पास गोली लगने का निशान था और आंत बाहर निकली हुई थीं। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शुरुआत में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान मृतक की पहचान रमेश सिंह के रूप में हुई। पुलिस जांच में सतेन्द्र, महावीर और बलवीर के नाम सामने आए।
बलवीर की निशानदेही पर तमंचा बरामद
अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, विवेचना के दौरान आरोपी बलवीर की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल किए गए अवैध तमंचे की बरामदगी की गई। इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट की स्वीकृति के उपरांत बलवीर के खिलाफ आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत अलग मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों मामलों में विवेचना पूरी करने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए। संबंधित मामलों में आरोप तय होने के बाद सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला
दस्तावेजों के अनुसार, हत्या के मुकदमे में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहपठित धारा 34 के तहत आरोप तय किए गए थे। वहीं, बलवीर के खिलाफ अवैध हथियार से संबंधित अलग मुकदमा चलाया गया। 29 अक्टूबर 2026 के दंडादेश में अदालत ने हत्या के मामले में सतेन्द्र, महावीर और बलवीर को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 40,000 रुपये जुर्माना लगाया। दूसरे मुकदमे में बलवीर को आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत दो वर्ष के कारावास और 2,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
मृतक की पत्नी को एक लाख रुपये प्रतिकर
अदालत ने दंडादेश में मृतक की पत्नी श्रीमती मुनीषा को एक लाख रुपये प्रतिकर के रूप में दिए जाने का आदेश भी दिया है। आदेश के मुताबिक, जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोषियों को निर्धारित अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने दोषियों को सजा भुगतने के लिए जिला कारागार, बरेली भेजे जाने और नियमानुसार सजा समायोजन की कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
