Badaun News : अवैध अस्पतालों पर प्रशासन का शिकंजा, छापेमारी से पहले ही शटर गिराकर फरार हुए संचालक
स्वास्थ्य विभाग और तहसील प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से मचा हड़कंप, बिना मानक संचालित संस्थानों पर सख्ती के संकेत
बदायूं : सहसवान क्षेत्र में आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग और तहसील प्रशासन ने कथित रूप से अवैध रूप से संचालित अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों के खिलाफ संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया। कार्रवाई की भनक लगते ही कई अस्पतालों के शटर गिर गए और कुछ संचालक मौके से फरार हो गए, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
संयुक्त टीम ने की औचक जांच
सहसवान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रशांत त्यागी और नायब तहसीलदार मोहित कुमार भाटी के नेतृत्व में गठित टीम ने क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों के पहुंचने से पहले कई संस्थानों का बंद मिलना चर्चा का विषय बन गया।
बंद अस्पतालों पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पतालों के पास सभी आवश्यक दस्तावेज और वैध अनुमति मौजूद थीं, तो छापेमारी की सूचना मिलते ही संस्थानों को बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी। इस घटना ने कई अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों पर होगी कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना पंजीकरण और निर्धारित मानकों के संचालित होने वाले चिकित्सा केंद्रों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने कहा कि मरीजों की जान जोखिम में डालने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जनता ने कार्रवाई का किया स्वागत
प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र के लोगों ने राहत महसूस की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से कुछ अस्पताल और क्लीनिक स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे थे। ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई आवश्यक थी।
सूचना लीक होने पर भी उठे सवाल
छापेमारी से पहले कई अस्पतालों के बंद होने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि कार्रवाई की सूचना आखिर पहले से कैसे पहुंच गई। स्थानीय स्तर पर इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि कहीं निरीक्षण की जानकारी पहले ही संबंधित लोगों तक तो नहीं पहुंचाई गई।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। नियमों के विरुद्ध संचालित अस्पतालों, क्लीनिकों और चिकित्सा संस्थानों की जांच कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
