अमृतसर में 31वां हिंद-पाक दोस्ती सम्मेलन संपन्न, भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत और सीमा खोलने की उठी मांग
सम्मेलन में सात प्रमुख मांगों का घोषणा पत्र पारित, अटारी-वाघा सीमा और करतारपुर गलियारा खोलने की अपील; डॉ. सुनीलम बोले- बर्लिन की दीवार गिर सकती है तो भारत-पाकिस्तान की सीमाएं क्यों नहीं खुल सकतीं
लेखक डॉ.सुनीलम
अमृतसर: अमृतसर में 31वां हिंद-पाक दोस्ती सम्मेलन भारत-पाकिस्तान संबंधों, आपसी विवादों और दोनों देशों के बीच शांति की संभावनाओं पर केंद्रित रहा। सम्मेलन का आयोजन हिंद-पाक दोस्ती मंच, लोककथा अकादमी अमृतसर, साफ्मा, पाकिस्तान-इंडिया पीपल्स फोरम फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी और पंजाब जागृति मंच की ओर से किया गया। सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान के संबंधों को बेहतर बनाने तथा दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया गया। इस दौरान सात प्रमुख मांगों वाला घोषणा पत्र भी पारित किया गया।
भारत-पाकिस्तान के बीच तत्काल बातचीत शुरू करने की मांग
सम्मेलन में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच मौजूदा संबंधों को लेकर चिंता जताई गई। आयोजकों ने तीनों देशों की सरकारों से आपसी संबंध सुधारने और लंबित विवादों के समाधान के लिए बातचीत शुरू करने की अपील की। घोषणा पत्र में कहा गया कि आपसी तनाव को बढ़ाकर क्षेत्र को किसी नए लंबे युद्ध की ओर ले जाने से बचना चाहिए। साथ ही पाकिस्तान से भारत विरोधी आतंकी संगठनों को किसी भी प्रकार का समर्थन नहीं देने और अपनी जमीन से भारत में नशीले पदार्थों तथा अवैध हथियारों की तस्करी रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई।
अटारी-वाघा सीमा और करतारपुर गलियारा खोलने की मांग
सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार तथा लोगों की आवाजाही बढ़ाने के लिए अटारी-वाघा सीमा को दोबारा खोलने की मांग की गई। दोनों देशों के नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रिया फिर शुरू करने की अपील भी की गई। इसके साथ ही सिख तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए करतारपुर गलियारा फिर से खोलने की मांग उठाई गई, ताकि श्रद्धालु करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में दर्शन और मत्था टेक सकें।
विभाजन के परिवारों के लिए आसान वीजा नीति की मांग
घोषणा पत्र में 1947 के विभाजन के दौरान सीमा पार जाकर बसे परिवारों के लिए आसान वीजा नीति शुरू करने की मांग भी रखी गई। आयोजकों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था से लोग अपने पूर्वजों के गांवों और कस्बों में जाकर पुराने रिश्तों को फिर से जोड़ सकेंगे।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर जताई चिंता
सम्मेलन में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित बढ़ते हमलों और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर चिंता जताई गई। आयोजकों ने तीनों देशों की सरकारों से अल्पसंख्यकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी क्षेत्र में भेदभाव नहीं होने देने की अपील की।
सिंधु जल संधि बहाल करने की भी मांग
सम्मेलन में भारत सरकार से सिंधु जल संधि को बहाल करने का आग्रह किया गया। आयोजकों ने कहा कि पानी से जुड़े किसी भी विवाद को दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। इसके अलावा 1947 के विभाजन में मारे गए लोगों की स्मृति में अटारी-वाघा सीमा और भारत-बांग्लादेश सीमा पर दो शांति पार्क बनाए जाने की मांग भी की गई।
शांति के लिए काम करने वालों को आसान वीजा देने की अपील
घोषणा पत्र में भारत-पाकिस्तान के बीच शांति और दोस्ती के लिए काम करने वाले संगठनों, कलाकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों को उदार वीजा देने की मांग की गई। आयोजकों का कहना है कि इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संवाद और आपसी समझ को बढ़ावा मिलेगा।
डॉ. सुनीलम बोले- भारत-पाकिस्तान की सीमाएं क्यों नहीं खुल सकतीं?
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत-बांग्लादेश-पाकिस्तान पीपुल्स फोरम के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने कहा कि यदि बर्लिन की दीवार गिराई जा सकती है तो भारत-पाकिस्तान की सीमाएं क्यों नहीं खोली जा सकतीं। उन्होंने कहा कि यदि 27 देशों का यूरोपीय संघ बन सकता है तो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और बर्मा का महासंघ क्यों नहीं बन सकता।
रक्षा बजट का हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च करने की अपील
डॉ. सुनीलम ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को अपने बजट का एक हिस्सा रक्षा के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वच्छ हवा और साफ पानी जैसी मूलभूत जरूरतों पर खर्च करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह ऐसे दिन की कल्पना करते हैं जब दोनों देशों के लाखों लोग सड़कों पर उतरकर अपनी सरकारों पर युद्ध, नफरत और हिंसा के बजाय अमन, शांति और मोहब्बत की नीति अपनाने का दबाव बनाएंगे।
अमेरिका-ईरान की बातचीत का दिया उदाहरण
डॉ. सुनीलम ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हो सकती है तो भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत क्यों नहीं हो सकती। उन्होंने दोनों देशों के बीच संवाद को ही तनाव कम करने का रास्ता बताया। उन्होंने अमृतसर में लगातार 31 वर्षों से हिंद-पाक दोस्ती सम्मेलन आयोजित करने के लिए डॉ. रमेश यादव को बधाई भी दी।
तीनों देशों के लोगों को दी श्रद्धांजलि
सम्मेलन में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्वतंत्रता तथा विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए शांति, आपसी सहयोग और भाईचारे का माहौल बनाना जरूरी है। सम्मेलन के आयोजकों ने पिछले तीन दशकों में हिंद-पाक दोस्ती और शांति के प्रयासों में सहयोग देने वाले संगठनों और लोगों का आभार भी जताया।
