अमेरिका दौरे के दौरान सिख समुदाय पर कथित टिप्पणी का मामला, न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने सुनाया फैसला
प्रयागराज : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सिख समुदाय पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने गुरुवार, 5 नवंबर को यह फैसला सुनाया। याचिका नागेश्वर मिश्रा और अन्य की ओर से दाखिल की गई थी।
वाराणसी की अदालत से भी नहीं मिली थी राहत
राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को लेकर याचिकाकर्ताओं ने पहले वाराणसी की निचली अदालत का रुख किया था। हालांकि, वहां से उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने निचली अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब याचिका खारिज होने के साथ राहुल गांधी को इस मामले में राहत मिली है।
अमेरिका दौरे के बयान को लेकर दाखिल हुई थी याचिका
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी के मुताबिक, राहुल गांधी ने सितंबर 2024 में अमेरिका यात्रा के दौरान सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर टिप्पणी की थी। आरोप है कि उन्होंने कहा था कि भारत में सिखों के लिए पगड़ी पहनने, कड़ा धारण करने और गुरुद्वारे जाने की आजादी को लेकर चिंता है। इसी बयान को आधार बनाकर नागेश्वर मिश्रा और अन्य ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
BNS की धारा 152 का भी दिया गया था हवाला
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि कथित बयान की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच कराई जानी चाहिए। इसके लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 का भी उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि बयान के अगले दिन खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने राहुल गांधी की टिप्पणियों का समर्थन किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
