असर नमाज के बाद पहला कुल शरीफ, रात में होगा जलसा -ए- दस्तारबंदी,देशभर से जायरीन का जमावड़ा
बरेली/बहेड़ी: खानकाह-ए-आलिया मंजूरिया शाहिदिया, जामिया गौसिया बशीरूल उलूम, शेखूपुर में 79वां सालाना दो रोजा उर्स-ए-बशीरी व मंजूरी रविवार को जुलूस -ए- परचमकुशाई के साथ शानदार अंदाज़ में शुरू हो गया। परचमकुशाई के जुलूस में इस्लामी परचम और तिरंगा साथ-साथ लहराते हुए अमन -ओ- शांति का संदेश दे रहे थे। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और “लब्बैक या रसूलल्लाह”, “मसलक-ए-आला हज़रत ज़िंदाबाद” “फैज़ाने शाहिदी ज़िंदाबाद” के नारे गूंजते रहे।
जुलूस-ए-परचमकुशाई का भव्य नज़ारा

जुलूस की कयादत सज्जादानशीन हज़रत मौलाना सय्यद नूरी मियां और सैय्यद फैजी मियां ने की। जुलूस ताज मस्जिद, होली चौराहा, पंजाबी कॉलोनी, नैनीताल रोड, माथुर रोड, मोती मस्जिद, शेरनगर, कब्रिस्तान रोड होते हुए बशीरी मस्जिद से दरगाह शरीफ पहुँचा, जैसे ही सज्जादानशीन हज़रत ने परचम को डोर हिलाकर परचमकुशाई की रस्म अदा की। दरगाह परिसर फूलों की बारिश से महक उठा। नारेबाज़ी, सना-ख्वानी और जज़्बात से वातावरण भर उठा।
रात को नातिया मुशायरे ने जीता दिल
दरगाह पर फातिहा के बाद रात में तरही नातिया मुशायरा आयोजित हुआ। स्थानीय और बाहरी शायरों ने कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी।
मुशायरा रात 1 बजे तक चला।
आज उर्स का दूसरा दिन, होगा पहला कुल शरीफ

17 नवम्बर, सोमवार को उर्स-ए-मुबारक के दूसरे दिन कार्यक्रम के तहत बाद नमाज़ ज़ोहर ख़त्म ख्वाजगान शरीफ, बाद नमाज़ असर, पहला कुल शरीफ, खुसूसी तकरीर, मौलाना कारी गुलाम यासीन मिस्बाही (बहेड़ी), फातिहा ख्वानी एवं आम लंगर, बाद नमाज़ मगरिब- हल्का-ए-जिक्र, बाद नमाज़ इशा- जलसा-ए-दस्तारबंदी
जलसा-ए-दस्तारबंदी में होंगे खुसूसी मेहमान
हज़रत मौलाना मुफ्ती सय्यद कफील हाशमी (बरेली शरीफ), शायर राशिद रज़ा मरकज़ी, शायर अकील सिद्दीकी (बरेली), मौलाना अख्तर रज़ा (बहेड़ी), मौलाना अबरार अहमद (किच्छा), मौलाना नसीम मिस्बाही (बहेड़ी) जलसे के बाद मदरसा जामिया गौसिया बशीरूल उलूम का सालाना दीक्षांत समारोह होगा,जिसमें 8 छात्रों की दस्तारबंदी की जाएगी। पहले ही दिन दूर-दराज़ क्षेत्रों से जायरीन बहेड़ी पहुँचने लगे।
लोगों ने दरगाह शरीफ़ पर चादरपोशी, गुलपोशी और फातिहा ख्वानी कर हाज़िरी दी। पूरा क्षेत्र उर्स-ए-बशीरी व मंजूरी की रूहानी रौनक से सराबोर है।
