बरेली: बरेली में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया। थाना आंवला पुलिस ने एक ऐसे फर्जीवाड़े का खुलासा किया है, जिसमें जिंदा लोगों को “कागज़ों पर मरा हुआ” दिखाकर करोड़ों की सरकारी पेंशन हड़पी जा रही थी।
फर्जीवाड़े का खुलासा
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह साल 2021 से सक्रिय था। आरोपियों ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और झूठे दस्तावेज़ तैयार कर सरकारी योजनाओं — जैसे विधवा पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन — के नाम पर ₹1 करोड़ 23 लाख 22 हजार से अधिक की ठगी की थी। इस रकम को गिरोह ने अपने और अपने साथियों के सात बैंक खातों में ट्रांसफर कराया था।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका
थाना आंवला पुलिस ने इस गिरोह के चार सदस्यों —
1. हरीश कुमार
2. शांति स्वरूप
3. मुनीष
4. प्रमोद
को गिरफ्तार किया है।
हरीश कुमार का जनसेवा केंद्र बिलौरी में था, जहां से सभी फर्जी कागज़ तैयार किए जाते थे। शांति स्वरूप और मुनीष गांव-गांव घूमकर भोले-भाले ग्रामीणों को “महामाया योजना” और “पैसा डबल स्कीम” के नाम पर फुसलाते थे और उनके आधार कार्ड इकट्ठा कर लेते थे। प्रमोद इस पूरे नेटवर्क का मुख्य लिंक था, जो सरकारी पेंशन की रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवाता था।
पुलिस ने की बड़ी बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों के पास से छह फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों की प्रतियां बरामद की हैं। जांच में यह भी पता चला है कि इस गिरोह ने 56 लोगों को विधवा पेंशन और 2 लोगों को वृद्धावस्था पेंशन के फर्जी लाभार्थी दिखाया था।
गरीबों के हक पर डाका
यह गिरोह न केवल सरकारी खज़ाने को चूना लगा रहा था, बल्कि उन गरीब और असहाय लोगों का भी हक मार रहा था जिनके लिए ये योजनाएं बनाई गई थीं। पुलिस की यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि अपराध कितना भी शातिर क्यों न हो — कानून की पकड़ से कोई नहीं बच सकता।
