समाजवादी एकजुटता सम्मेलन में सांसद जावेद अली, मेधा पाटकर से लेकर अबू आजमी तक बड़े चेहरे होंगे शामिल, संविधान, सामाजिक न्याय और पर्यावरण पर होगा मंथन
पुणे/लखनऊ : समाजवादी आंदोलन के 90 वर्ष पूरे होने के अवसर पर समाजवादी एकजुटता सम्मेलन का आयोजन 19 (आज) से 21 सितम्बर 2025 तक पुणे में किया जा रहा है। इस आयोजन में राष्ट्र सेवा दल, एस.एम. जोशी सोशलिस्ट फाउंडेशन, यूसुफ मेहर अली सेंटर, समाजवादी समागम और महाराष्ट्र गांधी स्मारक निधि जैसे संगठनों की प्रमुख भूमिका रहेगी। इस तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देशभर से समाजवादी नेता, पूर्व सांसद-विधायक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न आंदोलनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन का उद्देश्य समाजवादी आंदोलन की 90 वर्षों की यात्रा, चुनौतियों, संभावनाओं और एकजुटता की आवश्यकता पर विचार करना है।
ध्वजारोहण से समाजवादी एकजुटता सम्मेलन का आगाज
पहले दिन यानी आज (19 सितम्बर) को समाजवादी एकजुटता सम्मेलन का आगाज ध्वजारोहण से होगा। उद्घाटन सत्र में पंडित रामकिशन (पूर्व सांसद) ध्वजारोहण और प्रदर्शनी का लोकार्पण करेंगे। स्वागत भाषण एड. सविता शिंदे देंगी। इसके साथ ही आधार विचार पत्र प्रो. आनंद कुमार (समाजशास्त्री) प्रस्तुत करेंगे। संविधान की प्रस्तावना का वाचन सुभाष वारे करेंगे। समाजवादी आंदोलन के 90 वर्षों पर चर्चा का शुभारंभ माताप्रसाद पाण्डेय (नेता प्रतिपक्ष, उ.प्र. विधानसभा) और डॉ. सुनीलम एवं प्रो. विनोद प्रसाद सिंह की पुस्तक ‘समाजवादी आंदोलन के दस्तावेज’ के दूसरे संस्करण का लोकार्पण होगा। इस दौरान वरिष्ठ समाजवादियों का सम्मान समारोह भी होगा।
विकास की अवधारणा और समाजवादी विकल्प विषय पर चर्चा
समाजवादी एकजुटता सम्मेलन के दूसरे दिन यानी कल (20 सितम्बर) को सुबह “विकास की अवधारणा और समाजवादी विकल्प” विषय पर चर्चा होगी। इसकी अध्यक्षता मेधा पाटकर करेंगी। दोपहर को “सामाजिक न्याय, जन आंदोलन और व्यवस्था परिवर्तन” विषय पर वरिष्ठ न्यायाधीश एवं पत्रकार अपनी राय रखेंगे। शाम को “समाजवादी आंदोलन के 90 वर्ष पर व्यापक एकजुटता की आवश्यकता” विषय पर जावेद अली (सांसद, सपा), अबू आजमी (सपा महाराष्ट्र अध्यक्ष), हर्षवर्धन सपकाल (कांग्रेस), अशोक धवले (सीपीएम), उदय भट्ट (सीपीआई-एमएल) और अन्य नेता शामिल होंगे।
संविधान और लोकतंत्र पर आसन्न खतरे
समाजवादी एकजुटता सम्मेलन के तीसरे दिन (21 सितम्बर) को सुबह “संविधान और लोकतंत्र पर आसन्न खतरे” विषय पर डॉ. मनीषा गुप्ते, प्रो. शशिशेखर सिंह और अन्य वक्ता विचार रखेंगे। इसके बाद “शांति और न्याय के लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता” पर विशेष सत्र होगा। दोपहर “पुणे घोषणा पत्र” जारी होगा। इसमें समाजवादी आंदोलन और विभिन्न जन संगठनों की आगे की कार्ययोजना प्रस्तुत की जाएगी। समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. राजकुमार जैन करेंगे और समापन वक्तव्य रमाशंकर सिंह देंगे। सम्मेलन के दौरान हर शाम सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी, जिनमें राष्ट्र सेवा दल कलापथक के गीत-नृत्य, पथनाट्य “पुन्हा गांधी”, नृत्य नाटिका “मै सावित्रीबाई फुले” और “शिवाजी” विशेष आकर्षण होंगे। पूर्व विधायक डॉक्टर सुनीलम ने बताया कि यह सम्मेलन केवल अतीत का स्मरण ही नहीं करेगा, बल्कि वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में समाजवादी आंदोलन की भूमिका और भविष्य की दिशा पर ठोस प्रस्ताव भी रखेगा।
